फरीदपुर चेयरमैन राम सरन उर्फ लाला राम गुप्ता अपनी डायबिटीज समेत अन्य बीमारियों के साथ ही दोनों बेटों को क्या कारोबार करा दें, इसको लेकर बेहद चिंतित हैं। इन्हीं सारे मसलों को लेकर उन्होंने सोमवार को घर आए जलालाबाद (शाहजहांपुर) निवासी बहनोई नरेश चंद्र गुप्ता से एक घंटे तक विचार विमर्श किया था। बहनोई ने बताया कि लाला राम अपनी बीमारी के साथ ही बेटों को कारोबार कराने को लेकर ही काफी तनाव में हैं। इस पर उन्होंने उनसे कहा था कि आप ठीक से रहो, मैं बुधवार को आकर इन मसलों पर बात करके कुछ हल निकालता हूं। नरेश चंद्र ने बताया कि मंगलवार को उन्हें सूचना मिली कि लाला राम को गोली लग गई है तो वह मेडिसिटी अस्पताल पहुंचे। चेयरमैन के दोनों बेटों ने वर्ष 2005 में अलग धर्म में विवाह किया है। यह दोनों बरेली सिटी के राजेंद्र नगर में रहते हैं। पुलिस इसको लेकर भी जांच कर रही है कि कहीं इसी को लेकर तो घटना नहीं हुई। चुनाव को लेकर भी जांच की जा रही है।
घर में सन्नाटा, अस्पताल में मचा कोहराम
बरेली। फरीदपुर चेयरमैन के गोली लगने के बाद फरीदपुर से लेकर बरेली तक सनसनी फैल गई। वहीं उनके घर पर कोई भी व्यक्ति न होने से ताला लग लगने से सन्नाटा पसर गया। पुलिस मौके पर पहुंची तो ताला लगा पाया गया। इसे देख मौके पर पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया। वहीं यहां मेडिसिटी अस्पताल में चेयरमैन जब अस्पताल के आईसीयू में थे तो बाहर बैठी उनकी पत्नी गिरजा रानी और परिवार की अन्य महिलाएं विलाप कर रही थीं। चेयरमैन के जिस रिश्तेदार और परिचिति को गोली लगने की बात पता चली वह अस्पताल की ओर दौड़ पड़ा। शाम छह बजे तक अस्पताल में काफी भीड़ लग गई। मीडिया को बिल्कुल भी दूर रखा गया। कोई भी कुछ बताने को जुबान नहीं खोल रहा था। इसके बाद चेयरमैन को दिल्ली रेफर कर दिया गया।
चेयरमैन गोलीकांड में यह सवाल हो रहे खड़े
- चेयरमैन को गोली खुद लगी या उन्हें किसी ने मारी तो पुलिस को सूचित क्यों नहीं किया गया
- अस्पताल में मीडिया वालों से कुछ भी बताने को क्यों कतराते रहे घरवाले
- घर का एक दरवाजा जो हमेशा बंद रहता था वह मंगलवार को क्यों खुला