फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भ्रष्टों ने की कमाई.. ईमानदारों ने जान गंवाई

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। पुलिस और पशु तस्करों का गठजोड़ जिले में अब पुराना हो चुका है। पशु तस्करी के केंद्र बन चुके पड़ोस के जिले रामपुर जाने वाले पशु भरे तमाम वाहन बरेली से ही गुजरते हैं और पुलिस को पशु तस्करी की कमाई का चस्का लग चुका है। पशु तस्करी के धंधे से होने वाली इसी कमाई के कारण जिले में कई बार खाकी दागदार हुई है तो कई ईमानदार पुलिस वालों ने जान भी गंवाई है। दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि पशु तस्करों से साठगांठ सामने आने के बावजूद कई मौकों पर दागदार पुलिस वालों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई, जिसकी वजह से जिले में पशु तस्करी का कारोबार और तेजी से बढ़ा है।
विज्ञापन


दरोगा मनोज मिश्रा को गोली मारी
चार साल पहले पशु तस्करों को पकड़ने गए दरोगा मनोज मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मनोज मिश्रा के परिवार वालों ने इस घटना के बाद सीबीआई जांच की मांग करते हुए उनके सहकर्मियों पर ही उंगली उठाई थी, हालांकि इस पर ज्यादा गौर नहीं किया गया।

सिपाही संजीव को ट्रक से कुचला
पिछले साल 27 सितंबर में फतेहगंज पश्चिमी टोल प्लाजा पर पशु तस्करों को रोकने की कोशिश कर रहे सीबीगंज थाने के सिपाही संजीव गुर्जर को पशु भरे ट्रक से कुचल दिया गया था। इस मामले में होमगार्ड के कंपनी कमांडर मनोज शर्मा समेत कई को जेल भेजा गया। तब भी आरोप लगे कि पुलिसवालों की मिलीभगत से ही यह घटना हुई।
विज्ञापन


पशु तस्करों से महीने में पांच सौ बार बात, फिर भी बच गए
सिपाही संजीव की हत्या के बाद एसएसपी मुनिराज जी ने हाईवे के थानों में लंबे समय से तैनात सिपाहियों को दूसरे थानों में भेजा था। छानबीन में देहात के थानों में ऐसे कई सिपाहियों का पता चला जिनकी एक-एक महीने में पांच सौ से ज्यादा बार फोन पर पशु तस्करों से बात हुई।

पशु तस्करों पर निकला मेनका का लेटरपैड
27 मार्च 2018 को नवाबगंज में कुछ पशु तस्करों को पकड़ा गया तो उनकी गाड़ी में केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के अपर सचिव आनंद चौधरी का लेटरपैड मिला। इस पर लिखा था कि इन लोगों को फिजूल में परेशान न किया जाए। जांच में साबित हुआ कि यह लेटर फर्जी तरीके से तैयार किया गया था।

फिर बच गए 14 दागी पुलिस वाले
वर्ष 2014 में आईजी विजय मीना ने एसपी सिटी राजीव मल्होत्रा से ऐसे ही दागदार स्टाफ की जांच कराई तो 14 दागी पुलिस वालों के नाम सामने आए। इनमें एक अधिकारी के स्टेनो से लेकर दरोगा और सिपाही तक थे। प्रारंभिक जांच के बाद रेंज के दूसरे जिलों में इनके ट्रांसफर किए गए पर बाद में मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

एडीजी ने दिया ग्रीन सिग्नल तो इंस्पेक्टर ने किया खुलासा
पीरबहोड़ा में जाम लगाने के बाद पुलिस ने दबाव में हत्या की रिपोर्ट तो लिख ली थी लेकिन घटना को एक्सीडेंट ही मान रही थी। विवेचक इंस्पेक्टर इज्जतनगर मनोज त्यागी ने जांच शुरू की तो उसमें स्टाफ के लोग ही फंसते दिखाई दिए। इस पर उन्होंने कार्रवाई से पहले उच्चाधिकारियों को स्थिति बताई। मामला एडीजी अविनाश चंद्र तक पहुंचा। एडीजी ने दोषी पुलिस वालों के खिलाफ पुख्ता पुख्ता सबूत जुटाकर कार्रवाई करने को ग्रीन सिग्नल ही नहीं दिया, डीआईजी राजेश पांडेय और एसएसपी मुनिराज जी को भी मॉनीटरिंग करने को कहा। इसके बाद गुनहगार सिपाहियों के नाम सामने आए। एडीजी ने कहा कि अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर अपराधियों से जुड़ाव रखने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई होगी चाहे वे किसी भी रैंक के हों। ईमानदार स्टाफ को पूरा प्रोत्साहन दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें