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पूरे मंडल से रामपुर को फर्राटा भरती हैं गोवंशीय पशुओं भरी गाड़ियां

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बरेली। जीवित की बजाय मृत गाय की कीमत कई गुना ज्यादा होने का फंडा पशु तस्करी और हत्या को बढ़ावा दे रहा है। रात भर पशुओं भरे वाहन रामपुर दिशा में फर्राटा भरते हैं। बरेली के साथ ही मंडल के तीन अन्य जिलों से भी ऐसे वाहनों में पशुओं की बड़ी खेप आती है जो रामपुर के स्लाटर हाउसों तक जाती है। इस धंधे में पुलिस की भूमिका सवालों में रहती है।
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गो तस्करों का जाल लखीमपुर खीरी से किच्छा-बहेड़ी और रामपुर तक फैला है। बरेली में रिछा, देवरनिया, फरीदपुर, नवाबगंज, बहेड़ी, अलीगंज में बड़े पैमाने पर पशु तस्करी होती है। यहां से जीवित पशुओं के अलावा इनको काटकर मांस भी सप्लाई किया जाता है। पीलीभीत में तस्कर कोतवाली पूरनपुर, माधोटांडा, जरा, गजरौला, आसाम चौराहा पुलिस चौकी होते हुए रामपुर जाते हैं। वहीं कुछ तस्कर आसाम चौराहा चौकी होते हुए थाना जहानाबाद होते हुए किच्छा, बहेडी आदि निकलते हैं। शाहजहांपुर में पुवायां, मदनापुर, जलालाबाद, कांठ, निगोही, खुटार, कलान, मीरानपुर कटरा, जैतीपुर, तिलहर, गढ़ियारंगीन इलाके पशु तस्करी को बदनाम हैं। वहीं बदायूं में गो तस्करी दातागंज, सिविल लाइंस, उसहैत, उघैती, वजीरगंज, कुंवरगांव, सहसवान, इस्लामनगर आदि क्षेत्र में होती है।

नशा देकर ठूंसते हैं पशुओं को
पशुओं को लक्जरी गाड़ियों से लेकर कैंटर जैसे बंद वाहनों में ठूंसकर ले जाया जाता है। कई बार तो ऐसे वाहन दिन में ही थाने चौकियों के सामने से निकल जाते हैं। पशुओं को नशे के इंजेक्शन लगाए जाते हैं जिससे आड़े तिरछे पड़े होने के बावजूद वह आवाज नहीं कर पाते। वाहनों से निकालने पर अधिकांश पशु मर जाते हैं या उनके हाथ-पैर टूटे मिलते हैं।
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पुलिस की भूमिका मिली तो खैर नहीं: एडीजी

गोवंशीय पशु तस्करी को शासन प्रतिबद्ध है। पुलिस भी ऐसे पशु तस्करों पर प्रभावी कार्रवाई करती है। इन पर रासुका भी लगाई जा रही है। यदि किसी मामले में पुलिसकर्मियों की पशु तस्करों से संलिप्तता मिली तो वह खैर न समझें। उन पर अपराधी की तरह ही कार्रवाई होगी। - अविनाश चंद्र, एडीजी बरेली जोन

फैक्ट फाइल
शाहजहांपुर
- 2018 से अब तक पशु तस्करी के दर्ज मामले- 200
- 2018 से पकड़े गए गोवंश तस्कर- 331
- एक साल में पशु तस्करी में गैंगस्टर की कार्रवाई- 240
- गोवंशीय पशु तस्करी में पकड़े वाहन- 124
- बरामद किए गए गोवंशीय पशु- 538

पीलीभीत
- गो तस्करी पर लगाम नहीं
- जिले में कोई बड़ा गैंग नहीं, चंद तस्कर अलग-अलग काम कर रहे हैं।
- गोतस्करी में अभी तक किसी नेता या अधिकारी का नाम सामने नहीं आया है।
- वर्ष 2018 से लेकर अब तक 436 तस्करों में 378 पकड़े जा चुके हैं। इनमें नौ पर रासुका, 50 पर गैंगस्टर और 102 पर गुंडा एक्ट लगा।
- जिले का कोई गैंग गो तस्करी नहीं कर रहा। सबसे अधिक रामपुर के तस्करों का नाम आया है। सपा सरकार में सबसे अधिक तस्कर रामपुर के पकड़े थे, जो ट्रकों में लादकर गोवंशीय मवेशियों को ले जाते थे।
- गो तस्करी में वैसे किसी नेता का नाम प्रकाश में नहीं आया था लेकिन तीन साल पहले सिविल लाइंस थाने में तैनात रहे एसओ की वजह से एक सपा नेता का नाम चर्चा में जरूर रहा।
- वर्ष 2018 से लेकर अब तक गोवध निवारण अधिनियम के तहत 91 मामले दर्ज हुए और उसमें 295 गो तस्करों के खिलाफ कार्रवाई हुई, पशु क्रूरता अधिनियम के तहत वर्ष 2018 से लेकर अब तक 11 मामले दर्ज हुए। इनमें 28 आरोपियों को जेल भेजा गया। जो तस्कर भाग गए हैं उनकी तलाश की जा रही है।
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