फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यात्री ध्यान दें, ट्रेन लेट है, जमीन पर बैठ जाएं

विज्ञापन
Bareilly - फोटो : Bareilly
विज्ञापन
बरेली।
विज्ञापन

रेलवे को करीब बीस लाख रुपये रोजाना की इनकम देने वाला बरेली जंक्शन कहने को तो नंबर वन है, पर यहां यात्री सुविधाएं धेलाभर भी नहीं। बरेली से हर दिन आने-जाने वाले करीब 18 हजार यात्रियों के बैठने के लिए चारों प्लेटफार्म पर महज 700 सीटें हैं, जिन पर सिर्फ 2100 यात्री ही बैठ सकते हैं, ऐसे में ट्रेनें लेट होने पर इंतजार में खड़े रहने वाले यात्रियों को सीट पर जगह न मिलने पर जमीन पर बैठना मजबूरी हो जाता है। यहां तक की मजबूरन उन्हें फर्श पर ही बैठकर खाना तक खाना पड़ता है। सामूहिक शयन कक्ष में ताला लगा रहता है। महिला प्रतीक्षालय और सामान्य प्रतीक्षालय में बैठने तक की जगह तक नहीं मिल पाती है। पानी की भी महज 110 टंकी होने से ट्रेन आने पर मारामारी की स्थिति रहती है। कम टंकियां होने से जंक्शन पर पानी की किल्लत ट्रेन आने पर बढ़ जाती है, जिससे यात्रियों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है।

दोपहर 1.00 का बजे का दृश्य
दोनों थानों के बीच सामान रखकर सप्लाई करते हैं अवैध वेंडर
रविवार दोपहर एक बजे का समय था। जीआरपी और आरपीएफ थाने के बीच दो तीन बड़ी-बड़ी पेटियां रखी थीं, जिनमें खाद्य और पेय पदार्थ थे। यह सामान अवैध वेंडरों का था। सवा बजे अवध असम एक्सप्रेस आई तो वेंडर पेटियों में भरे सामान को निकालकर ट्रेन की तरफ दौड़े। उनके पास न ही रेल नीर था और न अधिकृत ब्रांड की पानी की बोतलें। सिर्फ मनमाने तरीके का सामान ही मनचाहे दाम पर बेचा जा रहा था। सफर में भूख प्यास की मजबूरी से यात्री भी मजबूरन सामान खरीद रहे थे। अमर उजाला की टीम ने जब उनकी तस्वीर कैमरे में कैद करनी चाही तो अवैध वेंडर भागने लगे।
विज्ञापन


दोपहर 1.30 बजे का दृश्य
विकलांग कोच में था सामान्य यात्रियों का कब्जा
रविवार दोपहर डेढ़ बजे थे। जम्मू से चलकर गोरखपुर को जाने वाली अमरनाथ एक्सप्रेस जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक पर आकर रुकी। ट्रेन रुकते ही यात्रियों में सीट पाने को भगदड़ मच गई। महिला यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कत उस समय हुई, जब पुरुष महिला और विकलांग कोच में बैठ गए। लंबी दूरी की इस ट्रेन के अन्य कोच का भी हाल बुरा था। यात्री ट्रेन के दरवाजे से बाहर तक लटककर अपने गंतव्य के लिए जाते नजर आ रहे थे। कोच के अंदर तो तिल भर की जगह नजर नहीं आ रही थी।

दोपहर 1:45 बजे का दृश्य
टिकट काउंटरों पर लगती हैं लंबी लाइन
रविवार दोपहर 1.45 बजे लखनऊ और दिल्ली के लिए आने जाने वाली ट्रेनों का वक्त था। जंक्शन के चार टिकट कांउटरों के अलावा महिला, विकलांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाए गए स्पेशल काउंटर पर भी यात्रियों की लंबी लाइन थी। अधिक भीड़ और कम टिकट काउंटर होने पर कई यात्रियों को टिकट न मिलने से उनकी ट्रेन तक छूट गई। उनका कहना था कि वादे तो लंबे चौड़े होते हैं, लेकिन सुविधाएं न के बराबर ही हैं।

स्वचालित सीढ़ियों के सामान की फट गई पैकिंग
जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक से दो, तीन और चार पर जाने के लिए फुट ओवरब्रिज के पास स्वचालित सीढ़ियां और लिफ्ट लगना है। इसका सामान भी छह महीने पहले आ गया है। डीआरएम मुरादाबाद ने भी पंद्रह अप्रैल से सीढ़ियां और लिफ्ट लगाने का कार्य शुरू होने का दावा किया था, लेकिन अब तक पूरा नहीं हुआ। जंक्शन पर पड़े सामान की पैकिंग तक फट गई है और बारिश में यह सामान जंक खाने लगा है।

बिखरे पड़े रहते हैं पार्सल के बंडल
जंक्शन के प्लेटफार्म पर पार्सल के बंडल इधर-उधर बिखरे पड़े रहते हैं, जिससे यात्रियों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ट्रेन आने पर अफरातफरी मचने पर यात्री टकराकर भी गिर जाते हैं।
विज्ञापन


फैक्ट फाइल: बरेली जंक्शन
- रोजाना यात्री आते जाते हैं करीब 18 लाख
- इनकम होती है रोजाना करीब 20 लाख
- चारों प्लेटफार्म पर यात्रियों के लिए बैठने को सीटें हैं 700
- पानी पीने के लिए पानी की टंकी 110

स्टेशन पर जितनी सुविधाएं और संसाधन हैं, उनसे ही बेहतर काम किया जा रहा है। यात्रियों की जिस तरह की समस्याओं से संबंधित शिकायत मिलती है, उन्हें उच्चाधिकारियों को भेज दिया जाता है।
- चेतन स्वरूप शर्मा, स्टेशन अधीक्षक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें