फतेहपुर सीकरी रजबहा में पानी का बहाव कम होता तो इनोवा सवारों की जान बचाई जा सकती थी। तेज बहाव के चलते ग्रामीण एवं युवा हिम्मत नहीं जुटा सके। रजबहा के बहाव को कम कराने के लिए पानी को बंद कराया गया। उसके बाद ग्रामीण रजबहा में कूदे लेकिन किसी को बचाया नहीं जा सका।
मथुरा-भरतपुर मार्ग स्थित मकेरा पुलिया पर हुए हादसे के बाद मौके पर पहुंचने वालों में मार्ग पर दौड़ लगा रहे युवा थे। उसके बाद पास के मोतीनगर के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के अनुसार उनको चीख-पुकार सुनाई दी थी। माना जा रहा है कि इनोवा चालक हरीशचंद्र की चीख-पुकार को मोतीनगर वासियों ने सुना। कुछ ही समय में मौके पर भीड़ जुट गई थी। लेकिन रजबहा के तेज बहाव के चलते कोई उसमें जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। इन ग्रामीणों ने पास के ही गांव मकेरा में हादसे की खबर दी। मकेरा से भी लोग मौके पर जुट गए। थाना मगोर्रा के प्रभारी हरीशवर्धन सिंह भी पहुंच गए। बंडपुरा की तरफ से रजबहा में आ रहे पानी को बंद कराया गया। पानी का बहाव कम होने पर गांव मकेरा के बांकेलाल, धीरज, हंसा, पुष्पेंद्र, जग्गो, विनोद और सोनू रजबहा में कूदे। तब तक काफी देर हो चुकी थी। इनोवा से नौ शवों को बाहर निकाला गया। चालक का शव कुछ दूरी पर मिला।
नहीं खुल पाया था कार का गेट
मथुरा। दरअसल जिस इनोवा में यह परिवार सवार था उसमें केवल चालक साइड वाली खिड़की ही खुल पाई थी। बाकी गेट नहीं खुले थे। माना जा रहा है कि कार में सवार लोगों ने गेट खोलने की कोशिश की होगी लेकिन गेट खुल ही नहीं पाए। हां चालक हरीशचंद्र ने जरूर अपनी साइड वाला दरवाजा खोल लिया था। वह बाहर तो निकला लेकिन तेज बहाव में बह गया। चालक का शव भी गाड़ी से दूर मिला था।
चार घंटे के बाद मौके पर पहुंचे डीएम-एसएसपी
फुटा लोगों का आक्रोश, सुनाई खरी-खरी
मथुरा (ब्यूरो)। इतना बड़ा हादसा भी अफसरों की नींद नहीं तोड़ पाया था। डीएम और एसएसपी भी चार घंटे के बाद मौके पर पहुंचे । दूसरे अफसर भी घंटों विलंब से आए। इसे लेकर लोगों में भारी आक्रोश रहा। अफसरों को खूब भला बुरा कहा गया। कई बार तो हंगामे जैसी स्थिति बन गई ।
तड़के साढ़े चार बजे हुए हादसे के बाद से मकेरा के ग्रामीण बचाव कार्य में जुट गए थे। किसी ने पुलिस को फोन किया तो किसी ने नहर विभाग को। प्रशासनिक अफसर सूचना के बाद भी काफी देर से पहुंचे। तहसीलदार, एसडीएम, एडीएम समेत पुलिस के अधिकारी भी विलंब से ही पहुंचे। डीएम और एसएसपी भी चार घंटे लेट यहां गए थे। इस पर लोगों ने खासी नाराजगी भी जताई। कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि इतने बड़े हादसे में भी इतने विलंब से आना लापरवाही को उजागर करता है। गुस्साई भीड़ ने हंगामा भी शुरू कर दिया था।
सोते हुए निकली जान, चालक ने मारे हाथ-पैर
मथुरा। तड़के 4:30 बजे इनोवा सवार महेश और उसकी बहन पूनम का परिवार यात्रा के अंतिम पड़ाव पर होने के चलते गहरी नींद में था। रजबहा में गिरी इनोवा के सवारों को तनिक भी बचने का समय नहीं मिला। गाड़ी में शवों स्थिति तो यही दिखाती है। इतना जरूर है कि ड्राइवर ने अपनी जान बचाने का प्रयास किया। 12 फीट गहरे रजबहा में गाड़ी का गेट खोलने के बाद तेज बहाव के चलते चालक बह गया। उसने खूब हाथ-पैर मारे, पर वो बच नहीं सका।
नहीं खुल पाया था कार का गेट
मथुरा। दरअसल जिस इनोवा में यह परिवार सवार था उसमें केवल चालक साइड वाली खिड़की ही खुल पाई थी। बाकी गेट नहीं खुले थे। माना जा रहा है कि कार में सवार लोगों ने गेट खोलने की कोशिश की होगी लेकिन गेट खुल ही नहीं पाए। हां चालक हरीशचंद्र ने जरूर अपनी साइड वाला दरवाजा खोल लिया था। वह बाहर तो निकला लेकिन तेज बहाव में बह गया। उसका शव भी गाड़ी से 100 मीटर दूर रजबहे में मिला था।
टेंपो से ढोए गए शव, नहीं आई एंबुलेंस
मथुरा। नहर से निकाले गए शवों को टेंपो से पोस्टमार्टम तक भेजने के लिए प्रशासन एंबुलेंस तक की व्यवस्था नहीं कर सका। मौके पर मौजूद भीड़ लगातार एंबुलेंस मंगाने की मांग कर रही थी कि मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया। कुछ शव पुलिस की गाड़ियों से तो कुछ टेंपो में लादकर पोस्टमार्टम हाउस तक भेजे गए थे। यह स्थिति तो तब थी जब सुबह से ही पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को इस हादसे की सूचना दे दी गई थी।
दो दिन से टल रहा था बालाजी के दर्शन का कार्यक्रम
मथुरा।
कहते हैं कि नियति का लिखा कोई टाल नहीं सकता। दो दिन पूर्व से महेश का बालाजी का कार्यक्रम टल रहा था। एक बार इनोवा चालक के परिवार में गमी हो गई तो दूसरे दिन गाड़ी ही खराब हो गई। आखिर शनिवार की रात को वो बालाजी के दर्शन के लिए निकल सके।
पोस्टमार्टम गृह पर पहुंचे महेश के अजीज दोस्त बरेली निवासी संतोष शर्मा ने बताया कि उनकी रोजाना सुबह-शाम महेश से दो बार मुलाकात तय थी। दोनों साथ-साथ चाय पीते। आठ जून को महेश की बहन पूनम उत्तराखंड के बिलासपुर से दो बच्चों के साथ आई थी। दो दिन से बालाजी जाने का कार्यक्रम टाला जा रहा था। गुरुवार की रात को महेश का बालाजी का कार्यक्रम बना तो शुक्रवार सुबह ड्राइवर हरीशचंद्र के परिवार में मौत हो गई। हरीशचंद्र वहां चला गया। शनिवार सुबह चलने का कार्यक्रम बनाया तो गाड़ी खराब हो गई। शनिवार दोपहर को हरीशचंद्र ने इनोवा की सर्विस कराई, एसी सही कराया। शनिवार की रात 11 बजे महेश और उनकी बहन का परिवार बालाजी हनुमान दर्शन को जाने के लिए निकले थे।
घर से निकलने से पहले जलाया तेल का दीपक
मथुरा (ब्यूरो)। बरेली से बालाजी हनुमान के दर्शन को परिवार सहित निकलने से पहले महेश शर्मा को कुछ अनहोनी का आभास हुआ था। इस पर महेश ने शनिवार रात्रि को कालोनी में पीपल के वृक्ष की पूजा की और सरसों के तेल का दीपक जलाया था। महेश के दोस्त संतोष शर्मा ने बताया कि महेश 11 बजे बालाजी दर्शन के लिए निकले थे। इससे पहले उनकी शनिवार रात आठ बजे मुलाकात हुई। महेश ने बताया कि वे सायं छह बजे ही दुकान बंद कर घर आ गए और दर्शन जाने की तैयारियों में जुट गए। कुछ अनहोनी की आशंका लग रही है। इस पर वह सायं को कालोनी में पीपल के पेड़ की पूजा करने गए और सरसों के तेल का दीपक जलाकर कुशलता पूर्वक यात्रा पूरी होने की मनौती मांगी।
भांजा दे रहा था गोवर्धन की परिक्रमा
मथुरा। इनोवा के फतेहपुर सीकरी में गिरने की खबर पर गोवर्धन की परिक्रमा कर रहे महेश के भांजे बरेली निवासी शिवम् भी अपने दोस्तों के साथ मौके पर पहुंच गया। शिवम ने बताया कि वो शनिवार की रात को दोस्तों के साथ गोवर्धन की परिक्रमा करने आए थे। हादसे की खबर मिलने पर यहां पहुंचे हैं।
दस लोगों की मौत के लिए प्रशासन जिम्मेदार
मथुरा। रविवार की तड़के हुई दस लोगों की मौत के लिए पूरी तरह से प्रशासन जिम्मेदार है। जिस पुलिया पर यह हादसा हुआ है वहां पहले भी कई बार एक्सीडेंट हो चुके हैं। गाड़ियां नहरों में समा चुकी हैं लेकिन प्रशासन ने इस तंग पुलिया को चौड़ा कराने के लिए कभी प्रयास नहीं किए। यहां लाइट तक की व्यवस्था नहीं कराई गई है। अगर प्रशासन ने ध्यान दिया होता तो यह हादसा न होता।
इस पुलिया को चौड़ा कराने की मांग पिछले करीब दस साल से गूंज रही है। ग्रामीणों ने भी प्रयास किए। जनप्रतिनिधियों के सामने भी मुद्दा उठाया गया। लेकिन इस पुलिया को दुरुस्त कराने के वादे सब वादों तक ही सीमित होकर रह गए। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार नापतौल कराई गई। जब भी इंजीनियर नापतौल करने पहुंचते थे तब लगता था कि अब पुलिया सुधर जाएगी। लेकिन सब कागजी कवायद ही बनकर रह गई।
हादसे का कारण सामने से आए ट्रक की लाइट बनी
मथुरा। अगर ग्रामीणों की मानें तो जिस वक्त इनोवा पुल से गुजर रही थी तभी सामने से एक ट्रक आया। माना जा रहा है कि ट्रक की लाइट चालक की आंख पर पड़ी और वह चकाचौंध के कारण पुलिया को सही से देख नहीं पाया था। इनोवा पुलिया से टकराई और नहर में गिर गई। पुलिस यह भी संभावना व्यक्त कर रही है कि हो सकता है कि चालक को नींद की झपकी लगी हो।
गुस्साए ग्रामीणों ने किया हंगामा, अफसरों को दौड़ाया
मथुरा। रविवार की तड़के मथुरा-भरतपुर मार्ग पर नगला मकेरा गांव की पुलिया पर हुए हादसे के बाद भड़के ग्रामीणों ने खूब हंगामा किया। यहां पहुंचे अफसरों को दौड़ा लिया था। खूब खरी खरी सुनाई गई। गोवर्धन क्षेत्र के विधायक कारिंदा सिंह को भी भीड़ का गुस्सा झेलना पड़ा। दरअसल नगला मकेरा गांव से सटकर फतेहपुर सीकरी को जाने वाली नहर में मकेरा पुलिया से टकराकर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। हर हादसे पर ग्रामीण इस पुलिया को चौड़ा कराने की मांग करते हैं। रविवार की तड़के हादसे के बाद ग्रामीण फिर सड़क पर आ गए। भरतपुर मार्ग को जाम कर दिया। अफसरों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। गुस्सा उस वक्त और बढ़ गया जब अफसर लेट पहुंचे। स्थिति यह थी कि भीड़ ने अधिकारियों को घेर लिया था। गुस्सा बढ़ता देख अधिकारी यहां से चले गए। इसी दौरान गोवर्धन के विधायक कारिंदा सिंह भी हादसे के करीब पांच घंटे बाद पहुंचे थे। विधायक को देखकर भी ग्रामीण भड़क गए थे।
डीएम ने कहा, अब पुलिया को दुरुस्त कराएंगे
मथुरा। जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी ने कहा कि पुलिया को दुरुस्त कराया जाएगा। यहां स्पीड ब्रेकर, रेडियम लाइट और आगे नहर होने के संकेत बोर्ड भी लगवाए जाएंगे। डीएम ने बताया कि पुलिया को चौड़ा कराने का भी प्रस्ताव भी तैयार कराया जाएगा।