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कर्मचारियों तक रहा संजय का आना-जाना, प्रबंधन रहा अंजान

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कर्मचारियों ने अस्पताल प्रबंधन को बताया होता तो बच सकती थी संजय की जान
- डेढ़ साल से वह आता रहता था अस्पताल में लेकिन वजह नहीं पूछी
- अगर समय रहते होती काउंसलिंग तो बच सकती थी संजय की जान
- परिवार वाले जानते थे अवसाद में हैं, फिर भी छोड़ देते थे अकेला
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। निजी अस्पताल के परिसर में एक शख्स डेढ़ साल से आता-जाता रहा। बीवी की याद में आने वाले संजय अग्रवाल से अस्पताल स्टाफ भी सहानुभूति रखता था, यही वजह है कि हल्की टोका टाकी तो की, लेकिन कभी गंभीरता से नहीं लिया। बेहद खास बात है कि अस्पताल प्रबंधन को भी कर्मचारियों ने जानकारी नहीं दी। अगर समय रहते अवसादग्रस्त संजय के बारे में जानकारी कर ली जाती तो काउंसलिंग के जरिए यह हादसा होने से रोका जा सकता था।
संजय अग्रवाल के बेटे तरंग, रचित घटना के बाद मौके पर पहुंचे थे। जैन मंदिर के पास उनकी किराने की दुकान है। उन्होंने बताया कि मां की मौत के बाद पिता अवसाद की स्थिति में रहते थे। मां को याद करते हुए अक्सर अस्पताल में आकर बैठा करते थे। पिता को समझाते भी थे, लेकिन वह मां की याद में जाना नहीं छोड़ा। वह पत्नी की मौत के बाद परिवार मेें भी कम बात करते थे। अब दुकान में बैठने के अलावा खाली वक्त में हर रोज अस्पताल जाया करते थे। प्रेमनगर थाने के प्रभारी पंकज वर्मा ने बताया कि परिवार के मना करने पर पोस्टमार्टम नहीं करवाया गया। परिवार ने किसी तरह का आरोप नहीं लगाया है।
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कर्मचारियों से पता चला कि हर रोज आता था
गंगाशील अस्पताल के निदेशक निशांत गुप्ता ने बताया कि ऐसे किसी शख्स को मैं नहीं जानता हूं। हादसे के बाद आस-पास के लोग और कर्मचारियों से मालूम हुआ कि यह शख्स हर रोज अस्पताल आता था। यह जरूर है कि उसकी पत्नी की कैंसर के इलाज के दौरान मौत हुई थी। अस्पताल परिसर बेहद व्यस्त रहता है।
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इमोशनल डिस्टर्बेंस के कारण उठाते हैं लोग ऐसा कदम
मनोवैज्ञानिक डॉ. सुविधा शर्मा का मानना है कि ऐसी घटना का कारण इमोशनल डिस्टर्बेंस सबसे ज्यादा होता है। अगर दिल के सबसे करीबी व्यक्ति की मौत हो जाए और उस व्यक्ति के दिल में यह बात बैठ जाए कि वह उसको बचा नहीं पाया या अच्छी कोशिश नहीं कर पाया। यह बात धीरे-धीरे उसके दिमाग में केमिकल इम्बेलेंस पैदा कर देती है। व्यक्ति मानसिक रूप से उसकी मौत को स्वीकार ही नहीं कर पाता। व्यक्ति अवसाद से ग्रस्त हो जाता है। उसको खोजने या अधिक उत्तेजना या आवेग में आकर वह आत्महत्या जैसा कदम तक उठा लेता है।
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