बरामदगी के बाद भी ई-रिक्शा उनके असली मालिकों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। क्योंकि इनका न तो रजिस्ट्रेशन है और न ही कोई नंबर। ऐसे में पुलिस भी रिक्शा किसका है यह तस्दीक कराने में मुश्किल महसूस कर रही है। किला थाने में करीब आधा दर्जन बरामद किए गए ई-रिक्शा खड़े हैं।
शहर में करीब डेढ़ हजार से अधिक ई-रिक्शा हैं। इनमें पांच सौ का ही आरटीओ आफिस से रजिस्ट्रेशन है। बाकी अनाधिकृत ढंग से चल रहे हैं। उनका न कोई नंबर है और न ही कोई पंजीकरण। उसी का फायदा चोर लुटेरे उठा रहे हैं। वह चालक को नशा देकर रिक्शा लूटने के बाद आसानी से ही उसकी औने पौने दामों में बिक्री कर रहे हैं। पुलिस के हत्थे भी वह आसानी से नहीं लग रहे हैं। पिछले दिनों किला थाने में एक ई रिक्शा लूटने की शिकायत पर पुलिस ने चार लोगों को पकड़ा तो बड़ा खुलासा हुआ था। छह ई-रिक्शा बरामद हुए, लेकिन यह किसके हैं, यह तय करना आज तक पुलिस के सामने एक चुनौती है।
शाहजहांपुर के बंटी का गैंग होने का शक
ई-रिक्शा लूटने में बरेली में शाहजहांपुर के बंटी का गैंग सक्रिय होने का शक जताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस इस पूरे गैंग का पर्दाफाश करने की फिराक में लग गई है।
शहर में ई-रिक्शा बिक्री के दस डीलर ही अधिकृत हैं और करीब दस जगह अनाधिकृत तरीके से ई रिक्शा सप्लाई किए जा रहे हैं। 500 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं, बाकी शहर में चलने वाले अनाधिकृत हैं। इन्हें रोकने के लिए समय समय पर कार्रवाई की जाती है।
- आरआर सोनी, आरटीओ