फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मोदी जी! महिलाएं सुरक्षित तो सरेआम छात्रा को वैन में खींचा क्यों

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। महिलाओं को सुरक्षित माहौल देकर उन्हें तरक्की की राह पर अग्रसर करने की मोदी सरकार की कोशिशों से कम से कम उत्तर प्रदेश की पुलिस का तो कोई सरोकार नहीं दिख रहा। महिलाओं-लड़कियों के लिए हालात कैसे हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परीक्षा देने जा रही छात्रा को दिनदहाड़े वैन में डालकर अगवा करने की कोशिश की घटना के बाद इज्जतनगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ शांति भंग करने के आरोप में कार्रवाई कर पीड़िता को थाने से भगा दिया। अब दस दिन बाद जब एसएसपी ने खुद घटना का संज्ञान लेकर इज्जतनगर पुलिस के पेच कसे, तब कहीं छात्रा के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की गई।
विज्ञापन

बीए फर्स्ट ईयर में पढ़ने वाली पीड़ित छात्रा का परिवार इज्जतनगर की एक मलिन बस्ती में हाल ही में अपना नया मकान बनवाने के बाद शिफ्ट हुआ है। पीड़िता के मुताबिक परिवार के लोगों का आरोप है कि यहां पहले से गली में रहने वाला उम्रदराज शख्स प्रेमपाल उन लोगों को यहां से खदेड़ने पर तुला हुआ है। प्रेमपाल की गतिविधियां भी ठीक नहीं हैं। छात्रा का कहना है कि उसकी परीक्षाएं चल रही हैं। वह 18 मार्च को सुबह छह बजे पेपर देने के लिए घर से निकली थी। घर से गली के बाहर निकलने के बाद वह महाकालेश्वर मंदिर के पास ऑटो का इंतजार कर रही थी। इसी बीच उसने देखा कि पास ही खड़े प्रेमपाल ने एक अनजान व्यक्ति को उसे दिखाते हुए उसकी ओर इशारा किया। कुछ ही देर बाद वह व्यक्ति उसके पास आ गया और उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा। उसने विरोध किया तो वहां से खिसक गया। मगर थोड़ी ही देर बाद फिर एक वैन लेकर पीछे से आया और उसका मुंह दबाकर उसे वैन में खींचने लगा।
छात्रा का कहना है कि उसने उसे धक्का देते हुए किसी तरह खुद को उसकी पकड़ से छुड़ाया और पैर से चप्पल निकाल ली। चीखना-चिल्लाना भी शुरू कर दिया। शोर सुनकर भीड़ इकट्ठी हो गई और लोगों ने उसकी मदद करते हुए सरेआम उसे खींचकर वैन में डालने की कोशिश कर रहे व्यक्ति को दबोच लिया। उसकी पिटाई करने के बाद उसे पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस ने पूछताछ की तो आरोपी ने अपना नाम कल्लू बताया। पीड़ित छात्रा ने तहरीर पर पूरा वाकया लिखकर दिया लेकिन पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सिर्फ शांतिभंग करने के आरोप में कार्रवाई की। वह दूसरे दिन दोबारा तहरीर लेकर गई तो थाने के एक दरोगा ने डांट-डपटकर उसे भगा दिया। पीड़िता इसके बाद एसएसपी से मिली। एसएसपी के आदेश पर पुलिस ने दस दिन बाद रिपोर्ट लिखी। इंस्पेक्टर मनोज त्यागी ने बताया कि विवेचना में स्थिति स्पष्ट करके कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन


गरीब परिवार की बेटी ने दिखाई हिम्मत, रिपोर्ट दर्ज कराकर मानी
पीड़ित छात्रा का परिवार मामूली हैसियत का है। पिता बीमार रहते हैं और मां लोगों के घरों में खाना बनाकर परिवार चलाती है। मुश्किल यह है कि इस परिवार में कोई बेटा नहीं है, ऊपर से छह बेटियां हैं। तीन की शादी हो चुकी है और बाकी तीन बेटियों को उनकी मां पूरी क्षमता से पढ़ा-लिखाकर किसी काबिल बनाने में जुटी हुई है। पीड़ित छात्रा भी बीए फर्स्ट ईयर की पढ़ाई कर रही है, साथ ही कामकाज में मां का हाथ भी बंटाती है। अपहरण की कोशिश की घटना के बाद पुलिस ने पहले तो साधारण परिवार की इस बेटी की तहरीर पर सही एफआईआर दर्ज नहीं की, वह दोबारा थाने पहुंची तो उसे बदसलूकी करके भगा दिया। लेकिन इसके बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी। थाने के कई चक्कर लगाने के बावजूद निराशा हाथ लगी तो उसने अपनी शिकायत एसएसपी तक पहुंचाई। एसएसपी ने उसकी शिकायत को गंभीरता से लिया और इज्जतनगर पुलिस को उसकी तहरीर पर एफआईआर लिखने के आदेश दिए, जिसके बाद पुलिस को उसकी प्रेमपाल और कल्लू दोनों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करनी पड़ी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें