बरेली। डेढ़ साल पहले बारादरी क्षेत्र से दस साल के अयान के अपहरण व हत्या की घटना में कोर्ट के आदेश पर कोतवाली पुलिस से तफ्तीश कराई जा रही है। अयान के पिता अपने भाई को आरोपी मानने को तैयार नहीं हैं, जिसे बारादरी पुलिस ने जेल भेजा था। परिवार के मुताबिक, पुलिस असली आरोपी पर जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रही है, जबकि सारे सबूत उसके खिलाफ हैं।
जगतपुर निवासी रईस अहमद के दस साल के बेटे अयान का 17 दिसंबर, 2017 को उस वक्त अपहरण कर लिया गया था जब वह पड़ोस में लकड़ी की तलवार खरीदने गया था। अगले दिन अपराह्न ढाई बजे दरवाजे पर परिवार को एक पत्र मिला था। इसमें फिरौती के रूप में दस लाख रुपये चाचा अनवर कारपेंटर से मांगे गए थे। कुछ देर बाद ही डोहरा मोड़ पर अयान का शव बोरे में मिला था। बारादरी पुलिस ने 25 दिसंबर को अयान के चाचा इरफान और पड़ोसी निहाल को पैसे की खातिर अपहरण और हत्या में जेल भेजकर चार्जशीट लगा दी थी। निहाल पिछले साल तो इरफान इसी साल दो जनवरी को जेल से छूटा है। परिवार की शिकायत पर कोर्ट ने निर्देश दिया तो कोतवाली के एसएसआई मनोज कुमार ने उन बिंदुओं पर विवेचना शुरू कर दी जिन पर परिवार को आपत्ति है।
चाचा अनवर का कहना है कि इरफान के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं था। विवेचक ने एक निजी फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट से फिरौती पत्र के लेख को इरफान का साबित कराकर उसे जेल भेजा, जबकि यह कोर्ट में मान्य नहीं है। वहीं, उनको विवादित प्लॉट दिलाने के नाम पर एक दलाल ने उनसे एक लाख रुपये ले लिए थे। यह रकम वह वापस नहीं कर रहा था। प्लॉट के लिए सऊदी में रह रहे उनके भाई ने नौ लाख रुपये और भेजे थे, जिसकी दलाल को जानकारी थी। उनका आरोप है कि इसी रकम को हड़पने के लिए दलाल ने अयान की हत्या की थी। जांच एसपी सिटी के निर्देशन में चल रही है। उन्हें साक्ष्य सौंपकर दलाल को आरोपी बनाने की मांग की पर सुनवाई नहीं हो रही है।
- पूर्व में लगी चार्जशीट को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। सिर्फ शेष बिंदुओं पर जांच हो रही है। अभी कोई नया तथ्य सामने नहीं आया है। जो रिपोर्ट तैयार होगी वह कोर्ट भेज दी जाएगी। - इंस्पेक्टर मनोज कुमार, जांच अधिकारी।