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कहां से आए नकद पंद्रह लाख, टेंपो से बिना सुरक्षा क्यों भेजे

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बरेली। पुलिस मुठभेड़ में मारे गए गाजियाबाद के इंदिरापुरम निवासी अशोक वाल्मीकि का कोई क्राइम रिकार्ड न मिलने के बाद जहां पुलिस बैकफुट पर है वहीं उसके परिजन कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी में हैं। अशोक के भाई विनोद ने क्षेत्रीय भाजपा नेताओं को एक पत्र सौंपकर बरेली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं तो लूट पीड़ित सराफ पर भी निशाना साधा है। वह इन नेताओं के साथ गृहमंत्री के पुत्र भाजपा विधायक पंकज सिंह से पैरवी कराने की कोशिश में है।
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विनोद ने पत्र में कहा है कि घटना के बाद पुलिस ने उन्हें कोई सूचना नहीं दी। जब नेट से जानकारी जुटाकर वह लोग बरेली कोतवाली आए तो कोतवाल गीतेश कपिल ने उन्हें जातिसूचक शब्द कहे। कहा कि योगी जी ने कह दिया है कि देश को बचाना है, बदमाशों को मार भगाना है। इसके बाद उन्हें भगा दिया। विनोद के मुताबिक जब प्रधानमंत्री ने नकद रूप से बड़ी रकम के लेनदेन को अवैध घोषित कर दिया है तो सराफ पंद्रह लाख रुपये कैसे और किसे भिजवा रहे थे, इसकी जांच क्यों नहीं की जा रही। सुबह साढ़े पांच बजे कौन सा बैंक खुल गया ? या रुपया घर में ही रखा था? इसका भी कोई जिक्र कहीं नहीं है। विनोद ने यह भी कहा कि इतनी बड़ी रकम को कार या बिना सुरक्षाकर्मी के टेंपो में ले जाने की आखिर क्या तुक थी? उसने कहा कि उसके पास ऐसे कई और सवाल हैं जिनका जवाब पुलिस नहीं दे सकेगी। इसलिए वह सीबीआई जांच की मांग को पैरवी कर रहे हैं ताकि सुनियोजित प्लान का सच सामने आ सके।
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