बरेली। पूरे सूबे में मदरसा बोर्ड और पासपोर्ट कार्यालयों का गठजोड़ सामने आया है। इस मामले में सबसे ज्यादा बरेली पासपोर्ट कार्यालय चर्चा में है। दरअसल, यहां फर्जी मार्कशीट पर 52 पासपोर्ट जारी होने का मामला पकड़ में आया है। इस बीच मदरसा बोर्ड ने गृह मंत्रालय से दिशा निर्देश मांगे हैं कि इस मामले में क्या किया जाए।
बरेली से बने कई पासपोर्ट संदिग्ध लोगों के हाथों में पहुंच गए हैं। ये लोग खाड़ी देशों में काम धंधे के लिए जाते रहे हैं, ऐसे में इनमें से कुछ के आतंकवादी संगठनों के संपर्क में आने की आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। बरेली कार्यालय से 52 पासपोर्ट फर्जी मार्कशीट से बनने का मामला सामने आते ही विदेश मंत्रालय में भी खलबली मच गई है, हालांकि अभी तक स्थानीय प्रशासन सोया हुआ है। पासपोर्ट अफसर अपने खामियां छिपाने के लिए सीधे मदरसा बोर्ड के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इस मामले में मदरसा बोर्ड की तहरीर पर लखनऊ हजरतगंज पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है। इधर, बरेली पासपोर्ट कार्यालय फर्जी मार्क शीट से पासपोर्ट बनवाने वाले लोगाें को सिर्फ नोटिस जारी करने की बात कह रहा है। पासपोर्ट अधिकारी का कहना है कि करीब 40 लोगों ने संग्दिध प्रमाणपत्रों से पासपोर्ट बनवा लिए हैं। उनको नोटिस जारी करने में भी सप्ताह भर लग सकता है। ऐसे में पासपोर्ट धारक कुछ कर बैठे तो कौन जिम्मेदार होगा।
अभी तक पहचान नहीं
क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय अभी तक उन लोगों की पहचान नहीं कर सका है, जिन लोगों ने मदरसा बोर्ड की फर्जी मार्कशीट से पासपोर्ट बनवाए थे, लेकिन पासपोर्ट अधिकारी का कहना है कि वह मदरसा बोर्ड की फर्जी मार्कशीट से पासपोर्ट बनवाने वाले आवेदकों को नोटिस जारी करेगा। बताया जाता है कि यह खेल मदरसा बोर्ड और पासपोर्ट कर्मियों के घालमेल से खेला गया है। हाईस्कूल अथवा समकक्ष शैक्षिक योग्यता वाले आवेदकों को ईसीआर नॉट रिक्वायर्ड की मुहर लगाकर पासपोर्ट दिया जाता है। इससे ही लोगों को विदेश जाने में आसानी होती है। यही वजह है कि खाड़ी देशों में जाने के लिए ज्यादातर लोगों ने फर्जी मार्कशीट का इस्तेमाल किया। ऐसे पासपोर्ट धारकों का संदिग्ध संगठनों के साथ घालमेल होना माना जा रहा है।
एफआईआर कराने में ही एक महीने की देरी कर दी
लखनऊ। आखिरकार पुलिस ने मदरसा बोर्ड की तहरीर पर फर्जी अंकपत्र मामले में हजरतगंज थाने में अज्ञात के नाम से एफआईआर दर्ज कर ली है। एक माह पहले की मदरसा बोर्ड रजिस्ट्रार की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया है। मदरसा शिक्षा परिषद का मानना है कि 52 लोगों के फर्जी अंकपत्रों में सभी दोषी नहीं हैं। इसमें कोई न कोई मास्टर माइंड है। मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार की मानें तो इस मामले के फर्जी पाए जाने पर हजरतगंज थाने को 28 नवंबर को प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए गए थे। मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार ने बताया कि सभी 52 व्यक्तियों के अंकपत्र के आधार पर सभी को दोषी कहना संभव नहीं है। जब तक की इसकी जांच न हो। उनका कहना है कि इस मामले में कोई न कोई मास्टर माइंड है जो धन उगाई के लिए ऐसे लोगों के नाम का इस्तेमाल कर रहा है, जिनका इससे संबंध ही नहीं है। यह जांच का विषय है।