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संवेदनहीनता: पालने के बजाए मारने को रेलवे ट्रैक पर छोड़ गए माता-पिता

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संवेदनहीनता: पालने के बजाए मारने को रेलवे ट्रैक पर छोड़ गए माता-पिता - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। कहा जाता है कि लड़के बुढ़ापे का सहारा होते हैं। वंश भी उन्हीं से चलता है, लेकिन जब लड़का दिव्यांग और मानसिक रूप से कमजोर हो तो उसे पालना भी बोझ लगता है। शायद इसलिए ही चार साल के दिव्यांग को माता-पिता रेलवे ट्रैक पर उसे ट्रेन से कटकर मरने के लिए छोड़ गए। भला हो जीआरपी का जिन्होंने चेकिंग के दौरान उसे देख लिया। रेलवे हेल्प लाइन ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया है।
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शुक्रवार शाम पांच बजे भोजीपुरा जीआरपी प्लेटफार्म पर चेकिंग कर रही थी। इस दौरान पटरियों की ओर से उसे रोने की आवाज आई। कांस्टेबल ने मौके पर जाकर देखा कि चार साल का बच्चा रो रहा है। वह न चल सकता है और ना ही कुछ बोल सकता था, उसके पैर भी मुड़े हुए थे। जीआरपी सिपाही ने तुरंत ही जंक्शन पर रेलवे हेल्प लाइन आफिस को फोन किया। काउंसलर नीरज कश्यप और जितेंद्र भोजीपुरा स्टेशन पहुंचे। वह बच्चे को लेकर यहां आ गए और सीडब्ल्यूसी के हवाले कर दिया। नीरज कश्यप ने बताया कि शनिवार को उसका मेडिकल कराया गया है। उसे इलाज के लिए हायर सेंटर लखनऊ रेफर किया जाएगा।
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