बरेली। मीट कारोबारी मुन्ना कुरैशी की पिटाई से मौत के मामले में फंसे पार्षद पति फिरदौस अंजुम को बचाने की कोशिश में एक बार फिर बारादरी पुलिस की फजीहत हो गई। इस मामले के विवेचक की ओर से दी गई फिरदौस अंजुम से गैरइरादतन हत्या की धारा हटाने की अर्जी को न सिर्फ अदालत ने खारिज कर दिया है बल्कि विवेचक और प्रभारी संयुक्त निदेशक अभियोजन के खिलाफ कार्रवाई का आदेश भी एसएसपी को दिया है।
सीजेएम अनिल कुमार सेठ की अदालत में विवेचक रवींद्र सिंह की ओर से दी गई इस अर्जी का अभियोजन अधिकारी केपी यादव ने यह कहकर विरोध किया कि केस डायरी में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया ही अभियुक्तों के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मामला बनता है, लिहाजा यह अर्जी खारिज किए जाने योग्य है। एफआईआर लिखाने वाले नईम की ओर से दी गई अर्जी को भी अभियोजन अधिकारी ने आगे भेज दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रभारी संयुक्त निदेशक अभियोजन ने विवेचक को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पूरे शरीर पर बाह्य चोट का निशान नहीं पाए जाने के आधार पर गैर इरादतन हत्या की धारा खत्म करने की राय दी मगर मृत्यु की परिस्थितियों और केस डायरी पर मौजूद साक्ष्यों का अध्ययन नहीं किया। अदालत ने आरोपी नौशाद उर्फ बड़े और फिरदौस के खिलाफ आईपीसी की धारा 211, 304, 387, 504 व 506 में 20 अगस्त तक रिमांड मंजूर करते हुए आईपीसी की धारा 304 खत्म करने की विवेचक की अर्जी को खारिज कर दिया। अदालत ने विवेचक रवींद्र सिंह के खिलाफ विवेचना में लापरवाही बरतने के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए आदेश की एक प्रति एसएसपी को भेजने को कहा। प्रभारी संयुक्त निदेशक अभियोजन के खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश की एक प्रति पुलिस महानिदेशक अभियोजन को भी भेजी जाएगी।
वसूली के आरोपों में पुलिस की बार-बार फजीहत
सकलैन नगर के मीटर कारोबारी मुन्ना कुरैशी की मौत के बाद यह मामला तूल पकड़ा था। मुन्ना के घरवालों ने आरोप लगाया था कि बारादरी पुलिस फिरदौस अंजुम के जरिये मुन्ना से दो लाख रुपये की अवैध वसूली करना चाहती थी। कई दिनों से उसे धमकियां देकर दबाव बनाया जा रहा था। वसूली के लिए ही उसे सिपाही श्रीपाल और हरीशचंद के जरिये फिरदौस अंजुम के बारातघर लाया गया, जहां मुन्ना की पिटाई के बाद उसे खून की उल्टियां होने लगीं। इस पर फिरदौस अंजुम और सिपाही वहां से भाग निकले। एम्स में मुन्ना की मौत के बाद इस मामले में फिरदौस अंजुम और दोनों सिपाहियों समेत कई लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। चौकी इंचार्ज के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई। दोनों आरोपी सिपाही भी अब तक नहीं पकड़े गए हैं।