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रात में नकली टिकट छापने के बाद दिन में बेचते थे सौदागर

Fri, 07 Jul 2017 12:59 AM IST
बरेली। 
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रात में नकली टिकट छापने के बाद दिन में बेचते थे सौदागर - फोटो : रात में नकली टिकट छापने के बाद दिन में बेचते थे सौदागर
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जंक्शन के बाहर यात्रियों की सहूलियत के लिए खोले गए जन साधारण बुकिंग सेंटर (जेटीबीएस) न सिर्फ रेलवे को चूना लगा रहे हैं, बल्कि नकली टिकट जारी कर यात्रियों के सामने भी मुसीबत खड़ी कर रहे हैं। रेलवे और आरपीएफ टीम शिकायत मिलने पर दो काउंटरों पर नकली टिकट बिक्री का भंडाफोड़ कर चुकी है। फिर भी यह खेल थम नहीं रहा है।
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यात्रियों को चूना लगाने का खाका रात में तैयार होता है। रात आठ बजे के बाद निजी टिकट काउंटर पर टिकट ही नहीं मिलता है। हालांकि टिकट काउंटर खुला होता है और उस पर बैठने वाला गुणा भाग में लगा होता है। बताया गया है कि नकली टिकट रात में छापे जाते हैं और सुबह इन्हें दिल्ली, लखनऊ के काउंटरों पर आने वाले यात्रियों को पकड़ा दिया जाता है। यात्री को तो पूरी दूरी का टिकट थमाकर पूरे पैसे वसूल लिए जाते हैं, जबकि रेल खाते में कम दूरी का टिकट जारी कर मामूली रकम ही जमा की जाती है।

और भी हो सकता है फर्जीवाड़ा का उजागर
बुधवार को पकड़े गए नीरज अरोड़ा, नीरज सक्सेना और मयंक अरोड़ा को बृहस्पतिवार को आरपीएफ ने जेल भेज दिया। उन्होंने बताया कि केवल वह ही नहीं, बल्कि अन्य कई भी इस तरह का खेल कर रहे हैं। एक टिकट पर सिर्फ एक रुपये के कमीशन में उन्हें मुनाफा नहीं होता, इसलिए इस तरह का खेल किया जा रहा है।
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पहले जेल भेजे गए आरोपियों की हो गई जमानत
तुफैल, विकास, धुव्र को भी पिछले दिनों आरपीएफ ने फर्जी टिकट जारी करने के आरोप में जेल भेजा था, जो जमानत पर छूट गए। अभी इस मामले को लोग भूले नहीं थे कि रेलवे जंक्शन के बाहर एक और फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया।

नौकरी न मिलने पर चुन लिया फर्जीवाड़े का रास्ता
नकली टिकट बेचने के आरोप में पकड़ा गया नीरज डिप्लोमा इंजीनियर है। उसने बताया कि कई जगह ट्राई करने के बाद भी जब नौकरी नहीं मिली तो उसने जेटीबीएस पर काम शुरू कर दिया। अधिक कमाई के चक्कर में ही उसने फर्जीवाड़ा करना शुरू कर दिया।
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