बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा के मैलानी रेंज के घास के मैदान में एरम प्रजाति के दो पौधे मिले हैं। यह पौधा एमोर्फोफैलस मारगरोटिफर फैमिली एरेसी (जिमीकंद) के परिवार का है। इंग्लैंड के रॉयल बोटेनिकल गार्डन को सुशोभित करने वाला फूल वाला पौधा अब तक भारत में केवल देहरादून और महाराष्ट्र में पाया गया गया है, पड़ोसी देशों में बांग्लादेश में इसे 120 साल पहले देखा गया था।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि एक 22 जून को डीटीआर बफरजोन के मैलानी रेंज अंतर्गत जटपुरा बीट के कंपार्टमेंट सात में एक फाटा के निरीक्षण के दौरान उन्हें एक अलग तरह का पौधा दिखाई दिया। इसमें एक फूल भी लगा था। इस विशिष्ट प्रकार के पौधे को देखकर एफडी ने इसकी फोटो लेकर अध्ययन किया और वनस्पतियों की प्रजाति सूची में भी सर्च किया तो पौधे की पहचान एरम प्रजाति के तौर पर हुई। बुधवार को भी उन्हें एक और पौधा उन्हीं कुछ ही दूरी पर मिला।
फील्ड डायरेक्टर पांडेय बताया कि बांग्लादेश के ढाका में 120 साल पहले इस पौधे को देखा गया था। रिकॉर्ड से ही पता चला कि भारत में 1895 में देहरादून में मैक क्यूरिन नामक वनस्पति विशेषज्ञ ने इसे देखा था। बोटेनिकल सर्वे ऑफ इंडिया उत्तरी क्षेत्र देहरादून के रिसर्च वैज्ञानिक डॉ. एसके सिंह और इलाहाबाद के डॉ. जीके सिन्हा महाराष्ट्र भी इस बात की पुष्टि कर चुके हैं। रायल बोटेनिकल गार्डन (इंग्लैंड) के रिकार्ड में भी इस पौधे की तस्वीर है। पांडेय ने बताया कि तराई में पहली बार मिले एरम प्रजाति के इस पौधे की कुछ और जानकारी जुटाई तो पता चला कि यह पौधे में फूल आने का समय मई और जून का महीना है। इसकी जड़ में कंद होता है। उन्होंने बताया कि चार दिन पहले जब उन्होंने पहला पौधे देखा था तो उसके शीर्ष पर फूल लगा हुआ था, लेकिन बुधवार को यह फूल सूख चुका था और उसकी जगह बीज दिखाई दे रहे थे।