बरेली। नाइट्रोजन और ऑक्सीजन के सिलिंडर भरने वाली परसाखेड़ा की बीएन इंडस्ट्रीज में अचानक हुए विस्फोट में एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत की घटना के तीन हफ्ते से ज्यादा समय गुजरने के बाद डीएम की ओर से मजिस्ट्रेटी जांच का आदेश दिया गया है। यह एसीएम थर्ड राजेश चंद्र को सौंपी गई है। हादसे के बाद से यह फैक्टरी बंद पड़ी हुई है।
बीएन इंडस्ट्रीज में यह घटना 15 मई को हुई थी। शाम करीब सवा छह बजे हुए जोरदार विस्फोट में फैक्टरी की छत तक उड़ गई थी। जिस जगह विस्फोट हुआ, वहां काम कर रहे फैक्टरी के कर्मचारी शैलेंद्र के शरीर चीथड़े उड़ गए थे। फैक्टरी मालिक नितिन खंडेलवाल इस घटना के बाद फरार हो गया। शैलेंद्र के घरवालों को कई घंटों तक हादसे की सूचना तक नहीं दी गई थी। बाद में परिवार के लोगों के काफी हंगामा करने के बाद थाना सीबीगंज में इस हादसे की रिपोर्ट दर्ज की गई। उस दौरान फैक्टरी में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की वजह से हादसा होने की बात कही गई थी, लेकिन फिर भी तकनीकी लिहाज से घटना की जांच नहीं कराई गई। सूत्रों के मुताबिक इस बीच फैक्टरी में घटना के ज्यादातर सबूत भी मिटा दिए गए।
हफ्ता भर से पहले संयुक्त मुख्य विस्फोटक नियंत्रक का घटना की मजिस्ट्रेटी जांच कराने का आदेश यहां डीएम कार्यालय में पहुंचा था, जिस पर डीएम ने अब मजिस्ट्रेटी जांच का आदेश दिया है। एसीएम थर्ड को 15 दिन के अंदर जांच पूरी कर रिपोर्ट देने का कहा गया है।
फाइलों में दबी हैं तमाम मजिस्ट्रेटी जांचें
बहेड़ी के टांडा मोहल्ले में शाहिद के मकान में छोटे खां अवैध रूप से पटाखे बनाता था। अक्टूबर 2016 में यहां अचानक विस्फोट हुआ था। इस घटना मजिस्ट्रेटी जांच 30 महीने से लंबित पड़ी है। इसी के आसपास नवाबगंज के गांव रसूला और बहेड़ी के गांव बिहारीपुर सीकरी में ताजियों को लेकर आगजनी और फायरिंग हुई थी। इसकी भी मजिस्ट्रेटी जांच भी अब तक पूरी नहीं हुई है। यह दोनों जांच एडीएम प्रशासन कार्यालय में दबी हुई हैं। जुलाई 2012 में बरेली में हुए सांप्रदायिक दंगे में इमरान की मौत हुई थी। इसकी जांच का आदेश मई 2017 में दिया गया लेकिन जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है। ऐसी कुल मिलाकर 16 जांच हैं जो पूरी नहीं हो पाईं।