बरेली। नवाबगंज जमीन घोटाले के आरोपियों से विभागीय जांच के तहत पूछताछ शुरू हो गई है। शुक्रवार को जांच अधिकारी एसीएम फर्स्ट ने कलक्ट्रेट के दो कर्मचारियों को बयान के लिए बुलाया। इसमें नकल नवीस तो उपस्थित हुआ लेकिन डाक रनर छुट्टी पर होने की बात कहकर गैरमौजूद रहा। इस मामले में दूसरी आरोपियों को भी बयान लेने के लिए बुलाया गया है। इस मामले में फंसे घोटालेबाज चार्जशीट का सही जवाब देने के बजाय एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इसलिए इन्हें अधिकारी अपने सामने बुलाकर पूछताछ कर रहे हैं।
जनवरी में एडीएम सिटी रहे ओपी वर्मा ने इस घोटाले का पर्दाफाश किया था। जांच में यह सामने आया था कि नवाबगंज के डंडिया नजमुल निशा में अबरार हुसैन की सौ बीघा जमीन राजस्व रिकॉर्ड में जालसाजी कर हड़पने की कोशिश की गई थी। करीब चार माह बाद बीते रविवार को डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने छह सरकारी कर्मचारियों सहित नौ लोगों के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। इस प्रकरण में सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए भी जांच चल रही है। इस मामले की जांच कर रहे अधिकारियों के सामने दिक्कत यह है कि इसमें फंसे कर्मचारी अपने आरोप पत्रों का सही जवाब देने के बजाय एक दूसरे पर गलती का ठीकरा फोड़ रहे हैं। इसलिए जांच अधिकारी एसीएम फर्स्ट मदन सिंह ने कलक्ट्रेट के रिकार्ड रूम के दो कर्मचारियों को अपने दफ्तर में तलब किया। इसमें नकल नवीस रकिमुल हुसैन ने एसीएम को अपना पक्ष दे दिया लेकिन डाक रनर वेद प्रकाश छुट्टी पर होने की बात कहते हुए जवाब के लिए पेश ही नहीं हुआ। एसीएम ने उसे सोमवार को हाजिर होने के लिए कहा है। इस घोटाले में फंसे अन्य आरोपी राजस्व निरीक्षक चोखे सिंह, परगना अरेंजर राम मनोहर सक्सेना, चकबंदी विभाग के अहलमद रमोद सक्सेना और उप संचालक चकबंदी कोर्ट के चपरासी मकरूद्दीन से भी जवाब मांगा जा चुका है।
जमीन को लेकर यह हुआ था फर्जीवाड़ा
नवाबगंज के डंडिया नजमुल निशा के अबरार हुसैन की सौ बीघा जमीन को धोखाधड़ी करके हापुड़ के तारिक के नाम दर्ज करा दिया गया था। बाद में तारिक के बेटे फिरोज ने इस जमीन का बैनामा तीन लोगों के नाम कर दिया। पहली बार इस जमीन की वर्ष 2005 में अमल दरामद हुई थी। इसके बाद वर्ष 2014 में उप संचालक चकबंदी रमाकांत शुक्ला ने इस खारिज करने के आदेश दिए थे, लेकिन वर्ष 2016 में इस आदेश को व्हाइटनर लगाकर पलट दिया गया। इसमें चकबंदी विभाग के स्टाफ की भूमिका तो संदिग्ध है ही, जमीन का फर्जी ढंग से खतौनी में इंद्राज करने के मामले में रिकॉर्ड रूम के कर्मचारी की भूमिका भी गड़बड़ मिली है।
आरोपी अपनी चार्जशीट का सही जवाब नहीं दे रहे। इसलिए दफ्तर में प्रस्तुत होकर जवाब देने के लिए कहा गया है। इसके बाद ही जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
- मदन सिंह, एसीएम फर्स्ट/ जांच अधिकारी