बरेली। जंगल में धीरे-धीरे खत्म हो रहे पानी के सोत जंगली जानवरों की मौत का सबब बन रहे हैं। 16 मई को भूख प्यास से बेहाल तेंदुआ पानी की तलाश में हाफिजगंज तक पहुंच गया था, जो मारा गया। सोमवार को मृत मिले चीतल के पोस्टमार्टम के बाद भी कुछ ऐसे ही तथ्य सामने आ रहे हैं। मंगलवार को आईवीआरआई के डॉक्टरों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ है कि चीतल को गांव के कुत्तों ने नोच-नोचकर मार डाला। क्यों कि चीतल के शरीर पर गोली या घाव के निशान नहीं मिले, बल्कि नोचने के कई निशान पाए गए। संभवत: चीतल पानी पीने के लिए जंगल से निकला होगा और कुत्तों का शिकार बन गया।
सोमवार को नवाबगंज क्षेत्र के ग्राम रिछोला चौधरी निवासी किसान हेतराम कुछ अन्य ग्रामीणों के साथ गेहूं की कटी पड़ी फसल देखने खेत गए थे। उस दौैरान वहां एक चीतल का शव पड़ा मिला था। उसकी जांघ और गर्दन पर घाव के निशान थे। ग्रामीण शिकारियों द्वारा गोली मारकर हत्या की आशंका जता रहे थे। सूचना पर वन विभाग की टीम ने चीतल के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को आईवीआरआई भेजा था। डीएफओ भरतलाल ने बताया कि मंगलवार को चीतल के पोस्टमार्टम में उसकी मौत कुत्ते के हमले से होना पाई गई है। उसके शरीर पर मिले घाव के निशान गोली लगने के नहीं मिले बल्कि कुत्तों के नोचने के थे। उन्होेंने बताया कि प्यास के कारण भटक कर यह चीतल गांव की ओर पहुंच गया होगा। जहां कुत्तों ने नजर पड़ते ही उसे दौड़ा कर नोच डाला होगा। कुत्तों के हमले के बाद भी चीतल उनके चंगुल से किसी तरह निकल गया होगा, लेकिन खून अधिक निकल जाने के कारण मौत हो गई होगी।