बरेली। हाईकोर्ट में मुकदमा जीतने के बाद सौ फुटा रोड पर एक प्लॉट पर निर्माण करा रहे लोगों पर दूसरे पक्ष ने हमला कर दिया। इलाके की पार्षद अनुपम सक्सेना के पति चमन बीचबचाव करने पहुंचे तो उनके साथ भी मारपीट कर दी। तमंचे भी हवा में लहराए। पुलिस आई तो हमलावर भाग निकले लेकिन तीन लोगों को पकड़ लिया गया। हमलावरों के खिलाफ दो अलग-अलग तहरीरों पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
सौफुटा रोड पर राजेंद्र का प्लॉट है जिस पर वह शनिवार को निर्माण करा रहे थे। सुबह दस बजे कई हथियारबंद लोगों के साथ पहुंचे राजेंद्र के चचेरे भाई झुमकलाल ने निर्माण रुकवा दिया। राजेंद्र ने झुमकलाल को हाईकोर्ट का आदेश दिखाया मगर झुमकलाल नहीं माना। तनातनी के बाद झुमकलाल के लोगों ने लाठी डंडे निकालकर राजेंद्र और उनके मजदूरों को पीटना शुरू कर दिया। इसी बीच पार्षद अनुपम के पति चमन सक्सेना ने बीचबचाव की कोशिश की मगर हमलावरों ने उनके साथ भी मारपीट कर दी। चमन और राजेंद्र पर तमंचे तान दिए। इस बीच लाठियां लेकर मिस्त्री और मजदूरों को भी दौड़ा दिया गया। सूचना मिलने पर यूपी 100 और थाना इज्जतनगर की पुलिस पहुंची तो हमलावर फरार हो गए। पुलिस दोनों पक्षों के कुछ लोगों को समाधान दिवस में ले आई जहां सीओ पीतमपाल सिंह ने पूछताछ की। झुमकलाल पक्ष के तीन लोगों को थाने में बैठा लिया गया है। चमन और राजेंद्र की ओर से झुमकलाल और उसके साथियों के खिलाफ अलग-अलग रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
फर्जी वसीयत खारिज होने के बाद बौखलाया झुमकलाल
कागजात की जांच के बाद इंस्पेक्टर मनोज त्यागी ने बताया कि रामचंद्र, प्यारेलाल और सियाराम तीन सगे भाई थे। सियाराम की शादी नहीं हुई। रामचंद्र के राजेंद्र आदि पांच बेटे हैं तो प्यारेलाल के झुमकलाल समेत तीन। सियाराम ने मरने ने पहले अपना कीमती प्लॉट भाई रामचंद्र के नाम कर दिया था। झुमकलाल ने इस प्लॉट की फर्जी वसीयत बनाकर दाखिल की लेकिन राजस्व विभाग में यह मामला पकड़ में आने के बाद उस पर केस दर्ज करा दिया गया। इसके बाद बरेली से लेकर हाईकोर्ट तक झुमकलाल ने मुकदमे किए मगर सारे मुकदमे हार गया। पिछले दिनों हाईकोर्ट से अपने पक्ष में फैसला होने के बाद राजेंद्र ने निर्माण शुरू कराया था।