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साब! हम बिगड़ैल हैं तो मैडम हमारे रूम में आती क्यों हैं..

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बरेली। अनाथ बच्चों के संरक्षण के लिए स्थापित सरकार संरक्षित संस्था बार्न बेबी फोल्ड में एक उम्रदराज युवक ने मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक अपने सिर पर उठाए रखा। लगातार हंगामे के बाद अधीक्षक प्रेम रोज ने आरोपी युवक अल्बर्ट को पुलिस बुलाकर कोतवाली भिजवा दिया। उनकी शिकायत के उलट कोतवाली में बैठे अल्बर्ट ने उन पर भी एक के बाद एक कई गंभीर आरोप जड़ दिए। शाम को पुलिस ने बमुश्किल दोनों पक्षों में सुलह कराई और अल्बर्ट को छोड़ दिया गया। उसे शराब न पीने और दोबारा हंगामा करने पर जेल भेजने की चेतावनी भी दे दी गई।
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अधीक्षक प्रेम रोज ने बुधवार सुबह स्टेशन चौकी प्रभारी सिद्धांत शर्मा को सूचना देकर बुलाया। उन्होंने अल्बर्ट नाम के युवक पर लड़कियों के कमरे में घुसने, शराब पीने और बिना बात अक्सर हंगामा करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि यहां 18 साल तक के लावारिस बच्चों को पालने का प्रावधान है। ज्यादा उम्र होने पर रोजगार दिलाकर बाहर भेज दिया जाता है। अल्बर्ट 37 साल का हो गया है। वह न तो बाहर जाता है और न ही उसकी हरकतें अच्छी हैं। पुलिस अल्बर्ट को कोतवाली ले आई। यहां अल्बर्ट ने मैडम पर ही गंभीर आरोप लगा दिए। कहा कि वे आधी रात को उन लड़कों के कमरे में आती ही क्यों हैं। कल रात जब वे कमरे में आईं तो उसने नाराजगी भी जताई। इसी पर वे नाराज हो गईं और पुलिस बुला ली। देर शाम मैडम ने अल्बर्ट को माफ कर दिया।

हल्द्वानी से आई बहन
अल्बर्ट के बारे में शेल्टर होम स्टाफ ने बताया कि वह शहर का ही है। उसके पिता उसकी मां के कत्ल में जेल चले गए। तब वह और उसकी छोटी बहन एंजो अनाथ हो गए। दोनों को शेल्टर होम में रखा गया। तब अल्बर्ट करीब चार साल का था। उसकी बहन एंजो पढ़ाई करके हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में नर्स हो गई है। भाई के हवालात में होने की जानकारी पाकर वह दौड़ी चली आई। शेल्टर होम के दूसरे लड़के और स्टाफ अल्बर्ट को खाने-पीने की चीजें देते रहे।
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संस्था में करीब 45 छोटे बच्चे हैं। पांच लड़के 18 साल से ज्यादा के हैं। अल्बर्ट तो 37 साल का हो गया है। वह हाईस्कूल तक पढ़ा और फिर बिजली का काम सीखा। काफी शैतान है। एक तरफ लाइट सही करता है तो दूसरी ओर खराब कर देता है। ज्यादा खर्च मांगता है। कई बार लिखापढ़ी भी की पर वो नहीं गया। दूसरे लड़कों को भी बिगाड़ रहा है। हंगामा करते अल्बर्ट को डांटने उसके कमरे में जाना पड़ा। मैं बाहर ही रही, सिस्टर ने उसे फटकारकर चुप कराया। - प्रेम रोज, अधीक्षिका, बार्न बेबी फोल्ड

मैं फ्री में शेल्टर होम में नहीं रहता। वहां का सारा बिजली का काम करता हूं। मैडम पता नहीं क्यों नाराज रहती हैं। हम कुछ लड़के एक कमरे में सोते हैं। मैडम वहां क्यों आ जाती हैं, ये उनसे पूछा जाए। हम कैसी भी हालत में होते हैं। मैडम के अलावा किसी से पूछ लीजिए, कोई मेरी कमी नहीं बताएगा। मैडम ही सबको सौ नंबर पुलिस बुलाने की धमकी देती हैं। मुझे भी फिजूल में पकड़वा दिया। - अल्बर्ट जार्ज

संस्था में हंगामा आए दिन का मामला है। नियमानुसार अधीक्षिका को ज्यादा उम्र वाले लड़कों को बाहर निकालना चाहिए। इसके लिए वे विभागीय लिखापढ़ी करें। पुलिस इसमें क्या कर सकती है। ज्यादा हंगामा होगा तो हम दोषियों को रिपोर्ट लिखकर जेल भिजवा देंगे। - पंकज वर्मा, सदर कोतवाल
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