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डिलीवरी कराने वाली डॉक्टर ने भी कहा- यह बच्चा वो नहीं

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बरेली। बच्चा बदलने की घटना को लेकर प्रेमनगर के अस्पताल में दिन भर हंगामा हुआ। पीड़ित परिवार के लोग अस्पताल के कागज दिखाकर यह साबित करने की कोशिश करते रहे कि उन्होंने बेटा भर्ती कराया था तो अस्पताल प्रबंधन के लोग इससे लगातार इनकार करते रहे। देर शाम तक दोनों पक्षों के अपनी-अपनी बात पर अड़े रहने की वजह से हंगामा चलता रहा। पुलिस पहुंची लेकिन मामूली छानबीन के बाद हाथ खींच लिए। आखिरकार पीड़ित परिवार के लोग बच्ची को लिए बगैर अपने घर लौट गई।
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राजेंद्र के परिवार के काफी कहने के बाद भी जब अस्पताल प्रबंधन यह मानने को तैयार नहीं हुआ कि उनका बच्चा बदल गया है तो उन्होंने रामपुर के रासडंडिया के जिस अस्पताल में बच्चे का जन्म हुआ था, वहां की डॉ. सना को बुला लिया। डॉ. सना ने भी बच्चे को अच्छी तरह देखने के बाद कहा कि बच्चा बदल गया है। बोलीं, यह बच्चा वो नहीं है जिसने उनके अस्पताल में जन्म लिया था। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने उनकी बात मानने से भी इनकार कर दिया।

जननांग की बनावट भी सामान्य नहीं
राजेंद्र के परिवार को थमाई गई बच्ची के जननांग की बनावट भी सामान्य नहीं है। बताया जाता है कि एक ही कमरे में इन्क्यूवेटर में करीब 15 शिशुओं को रखा गया था और वहां आने-जाने की मनाही थी, इसलिए परिवार शीशे के पार से ही बच्चे को देख पा रहा था। घटना के बाद बाकी बच्चे भी मिलाए गए पर नतीजा नहीं निकला। अस्पताल प्रबंधन अड़ा रहा कि बच्ची ही भर्ती कराई गई थी। जांच की खानापूरी के दौरान पुलिस ने भी सीसीटीवी फुटेज चेक करने या कर्मचारियों से पूछताछ जैसी जहमत नहीं उठाई।
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पहले भी अस्पताल से चोरी हुए बच्चे
20 मई 2012 को जिला अस्पताल में सनैया गांव के सुशील चौरसिया के डेढ़ वर्षीय बेटे अमित को उनकी बहन शालिनी की गोद से छीनकर युवक फरार हो गया था। काफी देर बाद बच्चा लावारिस पड़ा मिला। इससे पहले तीन महीनों में बच्चा चोरी की तीन घटनाएं अस्पताल परिसर में हुई थीं। एक मामले में तो कोई महिला मां की गोद से बच्चे को टीका लगवाने की बात कहकर ले गई थी। महिला अस्पताल में पैदा नवजात भी चोरी कर लिया गया। दोनों मामलों में बच्चों की बरामदगी काफी दिनों बाद हो सकी। बच्चे मिलने के बाद परिवारों ने कार्रवाई में दिलचस्पी नहीं ली तो पुलिस ने भी जांच बंद कर दी। वर्ष 2017 में रोजा पैसेंजर में जीआरपी ने चार माह का बच्चा बरामद किया। जांच में पता लगा कि उसे 25 मई 2017 को बरेली जिला अस्पताल से चोरी किया गया था।

बरेली के कोली विजय का रहा आतंक
पुराना शहर के सफाईकर्मी विजय वाल्मीकि बरेली के कोली के तौर पर चर्चित हुआ। नशेड़ी विजय ने एक बार तीन बच्चों को टॉफी दिलाने के बहाने अगवा कर लिया। उनके अभिभावकों ने पुलिस के साथ छानबीन शुरू की तो वह नाले में बच्चों को फेंककर फरार हो गया। दो महीने पहले भी विजय को पकड़ा गया था। तब वह एक बच्ची को चीज दिलाने के बहाने उठा ले गया था। बारादरी पुलिस ने उसे रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेज दिया। हालांकि विजय का कहना था कि उसे बच्चे अच्छे लगते हैं और वह उन्हें कुछ खिलाने के लिए दुकान तक ले जाता है। अपहरण की कोशिश नहीं की, लोगों ने उसे बदनाम कर दिया है।

अस्पताल में बच्चा बदलने की शिकायत आई थी। इस मामले में प्रेमनगर पुलिस को जांच सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। अभिभावकों को कार्रवाई का आश्वासन दिया है। - मुनिराज जी. एसएसपी
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