बरेली। चिटफंड कंपनी ने सपना दिखाया था करोड़पति बनाने का लेकिन कई लोग इसमें पैसा लगाकर कंगाल हो गए। इस हेल्थकेयर कंपनी ने अपना नेटवर्क आठ महीनों में ही यूपी के साथ दूसरे राज्यों तक फैला लिया था। 25 करोड़ से ज्यादा रकम का निवेश कराने के बाद अचानक ऑफिस में ताला डालकर सीएमडी-एमडी समेत पूरा स्टाफ फरार हो गया। लोगों को कंपनी का हेड ऑफिस दिल्ली में बताया गया था, लेकिन अब निवेशकों ने पता किया तो दिल्ली में उनका कोई ठिकाना नहीं मिला। कई दिनों से निवेशकों के भटकने के बाद भी पुलिस रिपोर्ट लिखने को तैयार नहीं हैं।
कंपनी का दफ्तर 23 अक्तूबर 2018 को इज्जतनगर इलाके में एक प्राइवेट अस्पताल के ऊपर खोला गया था। पैसा निवेश कराने की प्रक्रिया के दौरान कुछ लोगों को बतौर किस्त कुछ रुपये लौटाए गए। मगर बाद में कंपनी का साफ्टवेयर खराब होने का बहाना बनाकर यह सिलसिला बंद कर दिया गया। आरोप है कि सीएमडी एक्सीडेंट होने की बात कहकर कई दिन तक दफ्तर में नहीं बैठे। निवेशकों ने अपनी रकम लौटाने को ज्यादा दबाव बनाया तो एक मई से ऑफिस में ताला डाल दिया गया। पीड़ित लोग सीएमडी के घर गए तो परिवार वालों ने उसे अपनी संपत्ति से बेदखल करने की बात कहकर टाल दिया। इससे पहले वही लोग कंपनी के दफ्तर में आते जाते थे। पीड़ित लोगों ने शुक्रवार शाम इज्जतनगर थाने में तहरीर दी। शनिवार को एसएसपी कार्यालय में भी शिकायत की गई।
यह थी स्कीम
कंपनी की स्कीम के मुताबिक निवेशकों से एक बार में सात हजार रुपये जमा कराकर एक हजार का सामान (हल्दी, मिर्च, सर्फ, बादाम, किशमिश आदि) देते थे। दो लोगों को जोड़ने पर दो साल तक 21 सौ रुपये प्रति माह देने को कहा गया था। इसी तरह एक बार में तीन लाख रुपये जमा करने पर 25 हजार रुपये प्रतिमाह देने को कहा गया था। इस तरह लोगों को जल्द करोड़पति बनने का सपना दिखाया गया था।
ये भी हुए ठगी का शिकार
भोजीपुरा निवासी हेमंत ने प्रोवेल हेल्थकेयर कंपनी में दो लाख रुपये निवेश किए थे। डेलापीर के मुकेश ने 2.5 लाख रुपये, अनुराग 4.5 लाख, अनुज 5.5 लाख, हरीश दो लाख, उसावां बदायूं के त्रिभुवन ने 6 लाख रुपये, पंजाब के मलोद निवासी सुरेश 9 लाख रुपये निवेश किए थे। इनके अलावा प्रोवल हेल्थकेयर कंपनी में सैकड़ों लोगों ने रुपये निवेश किए थे।
अभी हमारे पास कोई तहरीर नहीं आई है। अगर ऐसा कोई मामला है तो जांच करने के बाद कार्रवाई की जाएगी। - पंकज त्यागी, प्रभारी निरीक्षक इज्जतनगर