बरेली। मौसेरे भाई पवन से संबंध सुधारने की कोशिश मासूम हरेंद्र पर भारी पड़ गई। हरेंद्र की बरामदगी के बाद अशोक उसकी कुशलता देखकर खुश हैं। मगर जो अनहोनी टल गई, उसे सोचकर वो अब भी कांप जाते हैं। पुलिस ने जब हरेंद्र उन्हें सौंपा तो उसे देखकर मां-बाप के पैरों तले जमीन खिसक गई। मामला खुलने से बचाने के लिए अपहरणकर्ता मासूम को नशे के इंजेक्शन लगाते थे और इंफेक्शन की वजह से जगह-जगह उसके शरीर पर फफोले पड़ गए हैं। अशोक ने खुलासा किया कि बच्चे के अपहरण के बाद राधा रानी उनके घर जाकर लगातार गतिविधियों की टोह लेती रही।
हरेंद्र के पिता अशोक ने बताया कि कासगंज पुलिस ने बेटा कैसे बरामद किया उनको कुछ नहीं बताया। उन्हें तो बेटा बरामद होने की जानकारी उसके सोरों कोतवाली पहुंचने के बाद मिली। उन्हें इस बात का संतोष है कि बेटा सकुशल बरामद हो गया। मगर उसके शरीर पर जगह-जगह इंजेक्शन और चोटों के निशान मिले हैं। संभव है कि अपहरणकर्ता उसे बेहोश रखने के लिए नशीला इंजेक्शन देते हों और डराने के लिए मारपीट भी की हो। इंजेक्शन का इंफेक्शन होने से मासूम हरेंद्र के शरीर पर जगह-जगह फफोले पड़ गए हैं, जो अब तक ठीक नहीं हुए हैं।
पवन ने घोंपा पीठ में छुरा..
अशोक ने बताया कि करीब 12 साल पहले मां की मौत के बाद उनके पिता ने मौसी एवं उनके परिवार से रिश्ता नहीं चलाया। सात-आठ महीने पहले उनकी नानी खत्म हुईं तो वहां पर वह गए और मौसेरा भाई पवन भी आया। तमाम गिले-शिकवे हुए और रिश्तेदारों ने भी समझाया तो वह रिश्ता चलाने को तैयार हो गए। इसके बाद आना-जाना शुरू हो गया। मगर आपराधिक प्रवृत्ति के पवन ने उनकी पीठ में छुरा घोंपकर बेटे का अपहरण तो किया ही उसकी जान लेने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी।
राधा रानी बड़ी सयानी, करती रही निगरानी
अपहरण के बाद हरेंद्र को इज्जतनगर के शास्त्री नगर स्थित राधा रानी के किराए के मकान पर रखा गया था। राधा भी हरेंद्र के पिता अशोक की मौसेरी बहन है। हरेंद्र के अपहरण के बाद वह हर दूसरे-तीसरे दिन अशोक के घर जाती थी और बेटा मिल जाने का दिलासा देकर उनकी गतिविधियों पर नजर रखती थी। एक बार तो उसने यहां तक कह दिया कि एक बच्चा खोया हुआ मिला है, वह उसके बारे में जानकारी कर रही है। दो दिन इसी बात पर टहलाने के बाद उसने कह दिया कि वह लड़का दस-बारह साल का है, उनका बेटा नहीं है।
दरोगा की जगह आम आदमी होता तो क्या छोड़ देती पुलिस
कासगंज से अगवा बच्चे हरेंद्र के पिता अशोक बेटे को पाकर खुश तो हैं पर पुलिस की कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर दरोगा की जगह किसी सामान्य व्यक्ति के घर अगवा बच्चे को रखा जाता तो क्या पुलिस इतनी आसानी से उसे छोड़ देती। बताया कि मौसेरी बहन राधारानी ने अपने पति के रूप में ही दरोगा का परिचय उनसे कराया था। पवन और राधारानी ने उन्हें मिलकर धोखा दिया। वह ये जख्म कभी नहीं भूलेंगे।
पुलिस की कहानी, समझ में नहीं आई
कासगंज में थाना पटियाली के गांव ककराला निवासी अशोक का चार वर्षीय बेटा हरेंद्र 21 फरवरी को लापता हो गया था। आठ दिन बाद हरेंद्र की सकुशल बरामदगी के लिए पांच लाख रुपये फिरौती देने की कॉल पहुंची। इसके बाद कासगंज पुलिस हरकत में आई और अशोक के मौसेरे भाई कासगंज में ही अहरौली निवासी पवन, उसकी पत्नी नीतू, बहन राधा रानी, राधा का बेटा राहुल और कमलेश को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने हरेंद्र की बरामदगी उझानी में ट्रेन और आरोपियों की गिरफ्तारी बरेली एवं कासगंज से दिखाई। मगर पुलिस की कहानी में काफी झोल हैं, कोर्ट में जिनका फायदा आरोपियों को मिलना लगभग तय माना जा रहा है। अशोक का कहना है कि वह भी पुलिस की कहानी समझ नहीं पा रहे हैं, लेकिन आरोपियों के छूट जाने का डर उन्हें सता रहा है।