बरेली। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में छात्राएं आए दिन छेड़खानी का शिकार होती हैं। इसका जितना जिम्मेदार बिगड़ैल छात्र हैं, उतना ही विश्वविद्यालय प्रशासन भी है। विश्वविद्यालय प्रशासन के ढुलमुल रवैये से इन घटनाओं पर लगाम नहीं लग पा रही है। एमएससी की छात्रा से छेड़खानी इसका ताजा उदाहरण है, जिसमें सब कुछ सरेराह हुआ। छात्रा ने शिकायत भी की, लेकिन यह शिकायत थाने पहुंचते-पहुंचते सिर्फ मारपीट और गालीगलौज में बदल गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भले ही एक माह के लिए छात्र को सस्पेंड कर दिया हो। सुरक्षा गार्ड को हटा दिया हो, लेकिन सवाल फिर वही उठता है कि जब कार्रवाई के नाम पर खानापूरी होगी तो कैंपस में ऐसी घटनाओं पर कैसे लगाम लगेगी।
एमएससी की छात्रा के साथ विश्वविद्यालय के ही एक कर्मचारी के बेटे ने छेड़खानी की। उसे क्लास में भी परेशान किया। जबरन उसका मोबाइल नंबर मांगा। छात्रा ने विरोध किया जब बाकी छात्रों ने आरोपी को दौड़ाया। इतना सब कुछ होने के बाद मामले को मारपीट में बदल दिया गया। शनिवार को विश्वविद्यालय ने छात्र को एक महीने के लिए निलंबित कर दिया। सुरक्षा गार्ड को हटा दिया, लेकिन बड़े साहब के खिदमतगार के बेटे के आरोपी होने की वजह से छेड़खानी की घटना को नहीं स्वीकार किया। विश्वविद्यालय प्रशासन के इस रवैये से छात्रों में रोष है। उनका कहना है जब छेड़खानी हुई तो फौरन कार्रवाई क्यों नहीं हुई। पिछले साल छह मामले हुए। इसमें सुरक्षा गार्ड द्वारा एमएससी की छात्रा के साथ छेड़छाड़ का मामला भी था। एलएलएम छात्रा वाली घटना में छात्र को एक साल के लिए डिबार किया। बाकी मामलों में चाहें वो अश्लील शायरी हो या फिर अश्लील फोटो वायरल करने का मामला सभी को दबा दिया गया। ठोस कार्रवाई न होने के कारण ही विश्वविद्यालय ने आए दिन छेड़खानी की घटनाएं हो रही हैं।
छात्रों की शिकायत के अनुसार ही तहरीर दी गई। विभागीय स्तर पर छात्र को एक माह के लिए सस्पेंड किया गया है। आरोपी गार्ड को भी हटा दिया गया है। जो आरोप लगाए उसी अनुसार कार्रवाई की गई। -प्रो. बीआर कुकरेती, चीफ प्रॉक्टर