फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अहलादपुर मुठभेड़ः पांच दिन बाद भी घटनास्थल पर दहशत

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। बदमाशन को आत भऔ हमने नाए देखौ। दुपहरिया में अचानक पुलिस वारन की गाड़ियां पहुंची तौ उनन ने डांट-डपट कै खेतन में से सबन को भजाए दौ। खेतन में ही अपनो सामान-सट्टा छोड़ कै हम सब भाज गए। कुछई देर में गोलियां तड़तड़ान लागीं। बाद में पुलिस वारन ने खेत में दो लाशें निकारीं।
विज्ञापन

अहलादपुर मुठभेड़ के पांच दिन बाद शनिवार को अमर उजाला की टीम ने फिर घटनास्थल का दौरा किया तो वहां खेतों में काम करते मिले लोगों की जुबानी कुछ ऐसा ही वाकया सामने आया। संवाददाता को यहां रूपापुर के तमाम लोग अपने खेतों में रोजमर्रा की तरह काम करते मिले। अमर उजाला की टीम को देखते ही किसी ने हांक लगाई, ओए.. चल रहे फिर पुलिस वारे आए हैं। रोककर बातचीत की कोशिश की कतराने लगे। बमुश्किल बात करने को तैयार हुए तो बताया कि सोमवार को दो बजे का वक्त रहा होगा। खेतों में रोजमर्रा की तरह काम चल रहा था। अपनी गाड़ियों से उतरकर अचानक कुछ पुलिस वाले दौड़ते हुए पहुंचे और उन्हें डांटकर वहां से भाग जाने को कहा। पुलिस वालों ने कुछ गोलियां भी चलाईं तो वे लोग बुरी तरह घबरा गएष समझ में तो कुछ भी नहीं आया लेकिन पुलिस वालों का यह रुख देखकर खेतों में सामान छोड़कर हाईवे की तरफ भाग खड़े हुए। बोले, बाइक पर सवार तो कोई नजर नहीं आया। बदमाशों के बारे में पुलिस से ही सुना।
बता दें कि पुलिस ने जिस खेत में बदमाशों का छिपना बताया था, उसके आसपास के सभी खेत रूपापुर गांव के लोगों के हैं। ये लोग रोज ही खेतों पर काम करने पहुंचते हैं। सोमवार को भी दोपहर के वक्त सात-आठ लोग खेत के आसपास काम कर रहे थे। एनकाउंटर के पांच दिन बाद भी ये ग्रामीण दहशत में नजर आए। कुछ दूरी पर खेतों में महिलायें काम कर रही थी। बोलीं, सुबह सात बजे हाईवे पर क्या हुआ, यह तो कुछ नहीं पता। एक ग्रामीण ने बताया कि उसे तो अखबार पढ़कर ही पता चला कि यहां बदमाशों पर गोलियां चली थीं।
विज्ञापन


खेत के गन्ने को काटने से पुलिस कर गई मना
गेंहू के खेत की रखवाली करने रुपापुर के मोहित, रितिक और सालीग्राम ने बताया कि सोमवार दोपहर किसी को यहां आने नहीं दिया गया। खेत में काम करने वाली महिलायें एनकाउंटर से संबंधित कुछ भी बात करने से कतराती रही। उन्होंने बताया कि जिस खेत में एनकाउंटर होना बताया गया है, उस खेत के गन्ने को पुलिस ने काटने से मना किया हुआ है।

पांच दिन बाद भी बिखरा पड़ा खून (फोटो)
अमर उजाला टीम को घटनास्थल पर लगे पेड़ों पर खून के निशान मिले। जिस खेत में एनकाउंटर होना बताया गया, उसके किनारे लगे पेड़ पर पांच दिन बाद भी खून के निशान साफ देखे जा सकते थे। खेत में भी कुछ जगह खून जैसे निशान देखने को मिले। अहलादपुर चौकी को निर्देश है कि इस स्थल पर ग्रामीणों की आवाजाही को रोका जाए।

मुझे दुकान चलानी है, मुठभेड़ पर यहां बात नहीं होगी
अहलादपुर चौकी के ठीक बगल में एक चाय की दुकान है, यहां कुछ लोग बैठे थे। चाय के साथ बातचीत में जैसे ही सोमवार को हुए एनकाउंटर का जिक्र हुआ। चाय वाले ने साफ कर दिया कि उसको यहां दुकान चलानी है। मुठभेड़ के संबंध में कोई बात नहीं होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें