बरेली। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के देश भर में भड़के सिख दंगों के 34 साल बाद कांग्रेेस नेता सज्जन कुमार को हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई तो उस भयावह दौर से गुजरे तमाम लोगों के जेहन में पुरानी यादें भी ताजा हो गईं। अपनों के अचानक पराया हो जाने की पीड़ा और जान-माल के नुकसान का डर का माहौल असहनीय था, लेकिन इसी माहौल में कुछ ऐसी मिसालें भी कायम हुईं जिन्होंने साबित किया कि मानवता से बढ़कर कुछ भी नहीं है।
पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के बाद 30 अक्तूबर की रात सबसे भयावह गुजरी थी। शहर की बदले हालात को बयान करते मॉडल टाउन गुरुद्वारा के पूर्व अध्यक्ष मालिक सिंह कालरा बताते हैं कि वह अपने कुछ दोस्तों के संग गुलाबनगर से गुद्दड़बाग की तरफ जा रहे थे। तभी अचानक किसी ने पीछे से आवाज लगाई, ओए देख शिकार जा रहा है...। यह सुनते ही मालिक सिंह घबरा गए, लेकिन उनके साथ मौजूद लोगों ने ही उपद्रवियों को समझाकर शांत किया और उन पर कोई आंच नहीं आने दी।
1984 के सिख दंगों के दौरान बरेली में ऐसी ही कई और भी घटनाएं घटीं। सिख समुदाय के लोगों को देखकर ऐसे ही दंगाई चिल्लाते थे। घेरकर लूटपाट और मारपीट होती थी। सिख समुदाय के लोगों को संपत्ति की हानि तो हुई, लेकिन शहर के समरस माहौल ने यहां कोई जनहानि नहीं होने दी। हालांकि इन घटनाओं की दहशत में बड़ी संख्या में सिख परिवार पंजाब पलायन कर गए थे। उस समय पूरे शहर में सिख समुदाय के लोग फैले हुए थे, अनहोनी की आशंका में सुरक्षित जगह शरण ली गई थी, लेकिन हालात काबू में होते चले गये और लोगों ने राहत की सांस ली।