टुल्ला - ये है योगीराज की बदली हुई पुलिस
लावारिस बताकर फूंक दी लाश, पिता से कहा- ढूंढ रहे हैं आपके बेटे को
जनसेवा केंद्र के लापता संचालक को पांच महीने तक ढूंढने का ड्रामा करते रहे इंस्पेक्टर
गायब होने के 24 घंटे के अंदर भोजीपुरा में बरामद हो गई थी लाश
हाईकोर्ट के निर्देश पर क्राइम ब्रांच को दी गई जांच, तब खुली पोल
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
मुख्यमंत्री बनने के कुछ समय बाद ही योगी आदित्यनाथ ने दावा किया था कि सूबे की पुलिस की कार्यप्रणाली अब सपा शासन जैसी नहीं रही है, लेकिन पुलिस ही मुख्यमंत्री के दावे की धज्जियां उड़ा रही है। इज्जतनगर से लापता जनसेवा केंद्र संचालक आदर्श की लाश 24 घंटे ही बाद रेलवे क्रॉसिंग के पास मिल गई, जिसे पुलिस ने लावारिस करार देकर फूंक दिया, लेकिन फिर भी पांच महीने तक उसके परिवार को उसे ढूंढने की बात कहकर चक्कर कटवाती रही। हाईकोर्ट के आदेश पर युवक को तलाश करने की जिम्मेदारी क्राइम ब्रांच को दी गई तो पुलिस की लापरवाही सामने आ गई। शुक्रवार को क्राइम ब्रांच ने परिवार को बुलाकर आदर्श की मौत की जानकारी दी तो वे बुरी तरह बिलख पड़े।
फतेहगंज पश्चिमी के उनासी गांव के आदर्श इज्जतनगर में जनसेवा केंद्र चलाते थे। उनके पिता सेवाराम कचहरी में मुंशी हैं। सेवाराम के मुताबिक आदर्श मठ लक्ष्मीपुर में किराये के कमरा में रहते थे। 27 नवंबर 2017 को वह आदर्श के कमरे पर गए थे, वहां से कचहरी चले गए। शाम को लौटे तो कमरे पर उन्हें आदर्श का मोबाइल मिला लेकिन आदर्श नहीं थे। मोबाइल से सिम कार्ड भी गायब था। सेवाराम के मुताबिक फतेहगंज पश्चिमी में रहने वाले एक फौजी की बेटी से आदर्श के प्रेम संबंध थे। है। उनकी तहरीर पर तीन दिसंबर को थाना इज्जतनगर में तत्कालीन इंस्पेक्टर कमरुल हसन ने आदर्श की अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की, लेकिन उनके बेटे का पता नहीं चला।
इंस्पेक्टर आश्वासन देते रहे कि आदर्श को ढूंढ रहे हैं, उधर परिवार पुलिस अधिकारियों से भी गुहार लगाता रहा। कोई नतीजा नहीं निकला तो परिवार ने हाईकोर्ट में अर्जी लगाई। कोर्ट ने पुलिस को 30 दिनों में आदर्श को ढूंढने का निर्देश दिया। इसके बाद विवेचना इज्जतनगर थाने से क्राइम ब्रांच को दिला दी गई। क्राइम ब्रांच ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि इज्जतनगर पुलिस जिस आदर्श को पांच महीने से ढूंढने का ड्रामा कर रही थी, उसकी लाश तो 27 नवंबर की रात को ही भोजीपुरा में रेलवे क्रासिंग के पास मिल गई थी जिसे पुलिस ने लावारिश बताकर फूंक डाला था।
रेलवे लाइन पर मिली थी आदर्श की लाश
सुरेंद्र सिंह क्राइम ब्रांच में आने से पहले भोजीपुरा थाने में तैनात रह चुके हैं। जांच शुरू करते ही उन्होंने डीसीआरबी से रिकार्ड मंगवाए। रिकार्ड के मुताबिक 27 नवंबर की रात को रेलवे के प्वाइंटमैन वीरेंद्र कुमार ने दभौरा खंजवार रेल फाटक के पास लाश पड़े होने की सूचना भोजीपुरा पुलिस को दी थी। इसकी जानकारी डीसीआरबी भेजी गई थी। भोजीपुरा पुलिस ने 72 घंटे बाद लाश को लावारिस बताकर उसका अंतिम संस्कार करा दिया। आदर्श के पिता सेवाराम ने बताया कि एडीजी, आईजी और एसएसपी कार्यालय में कई दफा उन्होंने इंस्पेक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। फिर निराश होकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दाखिल की।
अब मौत का राज कैसे खुलेगा
आदर्श की लाश मिलने का राज भले ही पांच महीने बाद खुला हो, लेकिन रेलवे ट्रैक पर उसकी मौत कोई हादसा था या साजिश के तहत उसकी हत्या की गई थी, इस पर से पर्दा उठना बाकी है। पुलिस की लापरवाही से अब सबूत मिलने भी काफी मुश्किल हो गए हैं। आदर्श के परिवार का कहना है कि वह इस मामले में जांच कराने के लिए अफसरों से संपर्क करेगा।
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यह विवेचक की गंभीर लापरवाही है। साफ है कि उसने आदर्श को ढूंढने का प्रयास ही नहीं किया। उसके खिलाफ जांच कराकर दंडनात्मक कार्रवाई कराई जाएगी। - ध्रुव कांत ठाकुर, आईजी बरेली रेंज