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सामूहिक दुष्कर्म में आरोपियों को फायदा पहुंचाने में नपे इंस्पेक्टर

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गैंगरेप के आरोपियों की मदद करने में नपे इंस्पेक्टर शाही
- सीओ मीरगंज की जांच में दुष्कर्म की विवेचना में लापरवाही आई सामने
- नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता का निकाह कराने वालों पर भी होगी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। शाही के एक गांव में सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता का जबरन निकाह कराने और आरोपियों की मदद करने के आरोपों में घिरे इंस्पेक्टर वेदप्रकाश को एसएसपी कलानिधि नैथानी ने हटा दिया है। उनके खिलाफ मीरगंज सीओ की जांच के आधार पर मंगलवार को कार्रवाई की गई। अब नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता का जबरन निकाह कराने वालों के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।
शाही थाना क्षेत्र के एक गांव से नाबालिग लड़की को अगवा करके शाने आलम, शुऐब उर्फ अजीम और इमरान ने उसके साथ दुष्कर्म किया था। इसके बाद आरोपियों ने पुलिस की मदद से 25 मई को आधी रात में पीड़िता का जबरन एक नाबालिग से निकाह करा दिया। जिस नाबालिग से निकाह कराया गया, उसी नाम का एक शख्स आरोपियों में शामिल है। पीड़िता की मां ने 29 मई को शाही पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने रिपोर्ट तो दर्ज कर ली लेकिन आरोपियों के बजाय उनसे मिलते-जुलते नाम वालों पर शिकंजा कस दिया। पीड़िता से जिस नाबालिग का जबरन निकाह कराया, उसे भी पुलिस ने दुष्कर्म के आरोप में जेल भेज दिया, जबकि दुष्कर्म करने वाले वास्तविक अभियुक्तों को नहीं पकड़ा गया। अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया तो एसपी (देहात) डॉ. सतीश कुमार ने गांव पहुंचकर छानबीन की। मामले में इंस्पेक्टर की भूमिका संदिग्ध लगने पर जांच सीओ मीरगंज को सौंपी गई। जांच में सामने आया कि इंस्पेक्टर की पूरे प्रकरण में भूमिका सही नहीं थी। उन्होंने आरोपियों को फायदा पहुंचाया, जबकि नाबालिग का जबरन निकाह कराने वालों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की।
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सीओ मीरगंज की जांच में इंस्पेक्टर की लापरवाही सामने आने पर उन्हें हटाया गया है। यह बाकी प्रभारियों के लिए भी मेसेज है। सिर्फ पीड़ितों की ही मदद करनी है, अपराधियों के खिलाफ सख्ती से पेश आना है। - कलानिधि नैथानी, एसएसपी
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