बाद में किशोरी की मां अदालत में मुख्य गवाही में पलट गई। कहा- उसने दरोगा को कोई बयान नहीं दिया। गांव वालों के कहने के अनुसार रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया कि वह पढ़ी-लिखी नहीं हैं। रिपोर्ट लिखने के बाद उन्हें पढ़कर नहीं सुनाई गई।
साथ ही बताया कि उन्होंने लड़की की शादी आरोपी के साथ कर दी है। बेटी के अब एक लड़का भी है। दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित न होने पर अदालत ने आरोपी व उसके साथी को दोषमुक्त करार दिया। साथ ही अदालत में झूठी गवाही देने पर लड़की की मां के खिलाफ वाद दर्ज किए जाने के आदेश दिए।
लड़की बोली- लोगों के बहकावे में आकर मां ने दर्ज करा दी रिपोर्ट
अपने बयान में लड़की ने कहा कि घटना के समय वह बालिग थी। आरोपी उसे बहला-फुसलाकर नहीं ले गए। लोगों के बहकावे में आकर मां ने बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी। यही नहीं लड़की के पिता ने भी गवाही में कहा कि आरोपी उसकी लड़की को भगाकर नहीं ले गए थे।
मुकदमा दर्ज कराने वाली लड़की की मां के अलावा पिता व खुद लड़की तीनों में किसी ने भी एफआईआर का समर्थन नहीं किया, जबकि आरोपी व उसके साथी को नाबालिग लड़की को भगाने के मामले में तीन माह जेल में रहना पड़ा था।