बदायूं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य राकेश गुप्ता और उनके परिवार के लोगों के हत्यारोपी रविंद्र पाल ने पिछले साल ब्लॉक प्रमुखी के चुनाव में ताल ठोकी थी। उसे पूरा विश्वास था कि चुनाव जीत लेगा, लेकिन उसके तेवर जब दूसरे लोगों को नुकसान पहुंचाने लगे तो उसे संरक्षण देने वाले भाजपा विधायक ने भी अपने हाथ पीछे खींच लिए। इसका नुकसान रविंद्र पाल को हुआ। उधर, राकेश गुप्ता के भाई पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजेश गुप्ता ने अपना समर्थन दूसरी प्रत्याशी ममता सिंह को दे दिया, जिससे ममता जीत गईं। इससे रविंद्रपाल तिलमिला गया और उसने राकेश गुप्ता के परिवार को खत्म करने की साजिश रच डाली।
उसावां ब्लॉक प्रमुख का चुनाव जुलाई 2021 में हुआ था। इस चुनाव में राकेश गुप्ता के भाई राजेश गुप्ता दावेदार थे तो दूसरी ओर रविंद्र पाल भी दावेदार था। तीसरी दावेदार दिनेश सिंह की पत्नी ममता सिंह थीं। उसावां ब्लॉक क्षेत्र में कुल 68 वोट थे, जिसमें राजेश गुप्ता के पाले में 29, रविंद्रपाल के पाले में 31 और ममता के पाले में कुल आठ वोट थे। उस वक्त वोटों का जोड़तोड़ चल रहा था। उससे पहले रविंद्र पाल एक भाजपा विधायक का खास था, लेकिन प्रमुख के चुनाव में उसके तेवर बदल गए थे। ग्रामीणों के अनुसार, वह अपने साथ चार ऐसे लड़कों को रखता था, जो सिर पर काला कपड़ा बांधकर और अपने हाथों में असलहे लेकर कमांडों की तरह उसके साथ चलते थे। जब वह गाड़ी से उतरता था, तब वही लड़के गाड़ी का दरवाजा खोलते थे। उसके यह तेवर विधायक को पसंद नहीं आए। इससे उन्होंने रविंद्र पाल को अपना संरक्षण देने बंद कर दिया था।
इधर, राजेश गुप्ता अपने वोट बढ़ाने में लगे थे। उन्हें खुद के जीतने से ज्यादा रविंद्र को हराने की चिंता थी। इसलिए उन्होंने ममता सिंह का साथ देना उचित समझा। विधायक ने भी ममता सिंह का समर्थन कर दिया, जिससे ममता ब्लॉक प्रमुख बन गईं। 20 अगस्त को जब उनका शपथ ग्रहण हुआ तो रविंद्र तिलमिला गया। सूत्र बताते हैं कि उसी वक्त रविंद्र ने राकेश गुप्ता और उनके परिवार को मिटाने की साजिश रच डाली। उसे लगने लगा था कि जब तक यह लोग रहेंगे तब तक उसका कुछ नहीं होने वाला और फिर उसने 31 अक्तूबर को तिहरे हत्याकांड को अंजाम दिया। (संवाद)
पत्नी को दो तथा राकेश व मां को मारी एक-एक गोली
थाना पुलिस ने सोमवार रात तीनों शवों के पोस्टमार्टम करा दिए। एसएसपी डॉ. ओपी सिंह के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार राकेश गुप्ता को कनपटी पर एक गोली मारी गई। उनकी मां को सीने पर एक गोली मारी गई, जबकि उनकी पत्नी को दो गोलियां मारी गईं। उनके एक सीने पर और एक सिर में गोली लगी थी।
दोनों परिवार के बीच यह रंजिश करीब 51 साल से चली आ रही है, लेकिन जब पिछले साल ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में रविंद्र हार गया था, तभी से यह रंजिश और बढ़ गई। अब तक की छानबीन में यही पता चला है कि पिछले साल चुनाव को लेकर यह हत्याएं हुई हैं। ये हत्याएं स्वयं इन्हीं लोगों ने की हैं या कुछ अन्य लोग भी शामिल हैं, इसकी जांच के लिए पुलिस टीम लगा दी गई है। जो आरोपी नहीं पकड़े गए हैं, उन्हें जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। -डॉ. ओपी सिंह, एसएसपी।