बरेली। निजी वाहनों का व्यवसायिक इस्तेमाल कर सरकारी विभाग ही परिवहन विभाग को चूना लगा रहे हैं। बार-बार नोटिस के बाद भी सरकारी विभागों की ओर से परिवहन विभाग को ऐसे निजी वाहनों की सूची नहीं दी जा रही जिनको किराये पर रखा गया है। इससे परिवहन विभाग को टैक्स का नुकसान हो रहा है।
स्वास्थ्य विभाग, सहकारिता, बिजली निगम, लोक निर्माण विभाग, विकास और शिक्षा समेत कई विभागों में निजी वाहनों को मासिक किराये पर रखा गया है। ज्यादातर वाहन अधिकारियों के करीबियों और नाते-रिश्तेदारों के हैं। गौर करने की बात यह है कि इन वाहनों का रजिस्ट्रेशन निजी इस्तेमाल के लिए कराया गया है। इससे रजिस्ट्रेशन फीस में भी छूट ली गई और इन वाहनों का इस्तेमाल व्यवसायिक रूप में करके कमाई भी की जा रही है। करीब दो महीने पहले प्रमुख सचिव परिवहन की बैठक के दौरान भी परिवहन विभाग के अधिकारियों ने इस मामले को उठाया। प्रमुख सचिव ने सभी विभागों से किराये पर लिए गए निजी वाहनों की सूची उपलब्ध कराने को कहा था। एआरटीओ प्रशासन मनोज कुमार ने बताया कि अब तक किसी विभाग ने वाहनों को सूची नहीं दी है। फिर से नोटिस जारी किया जा रहा है।