बरेली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सत्र 2023-24 में कक्षा-9वीं से 12वीं की मूल्यांकन योजना को नया रूप दिया है। नई शिक्षा नीति के तहत परीक्षाओं के पैटर्न में बदलाव किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे विद्यार्थियों के पढ़ने और शिक्षकों के पढ़ाने का तरीका भी बदल जाएगा। विद्यार्थी नौवीं से ही स्नातक की प्रवेश परीक्षाओं को समझ सकेंगे।
बोर्ड की ओर से जारी पत्र के अनुसार नौवीं व दसवीं की परीक्षा में 50 फीसदी योग्यता आधारित प्रश्न होंगे। बहुविकल्पीय प्रश्नों का वेटेज 20 फीसदी होगा। 11वीं की परीक्षाओं में योग्यता आधारित 30 और बहुविकल्पीय 20 फीसदी प्रश्न होंगे। कक्षा-12वीं में 40 प्रतिशत प्रश्न योग्यता आधारित और 20 प्रतिशत बहुविकल्पीय होंगे।
इस तरह करनी होगी तैयारी
- चैप्टर पूरा पढ़ने की आदत डालनी होगी। नौवीं और 11वीं की परीक्षाओं में भी किताब में पूछे गए प्रश्नों पर निर्भर नहीं रह सकते हैं।
- रटने से ज्यादा समझना होगा। योग्यता आधारित प्रश्नों में सामान्य विषय को उलझाकर उसे जीवन से जोड़कर पूछा जा सकता है।
- छोटे-छोटे फैक्ट पर विशेष ध्यान देना होगा। एक-एक अंक वाले प्रश्नों में फैक्ट आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।
- बहुविकल्पीय प्रश्नों की संख्या बढ़ने से स्टेप मार्किंग भी ज्यादा नहीं होगी। इसलिए हर विषय को ज्यादा समय देकर तैयारी करनी होगी।
- नोट्स बनाने से मुख्य बिंदुओं को याद करना आसान होगा। किताब में जरूरी सूत्र व संख्या आदि को रेखांकित कर पढ़ें।
क्या होगा फायदा
- नए पैर्टन से विद्यार्थियों के लिए प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी आसान होगी।
- बहुविकल्पीय प्रश्न की संख्या बढ़ने से समय बचेगा।
- विद्यार्थियों को शब्द सीमा का विशेष ध्यान नहीं रखना होगा।
- रचनात्मकता और अन्य क्षमताओं का विकास होगा।
- प्रवेश परीक्षाओं के लिए कोचिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी।
-
बोर्ड की ओर से पैटर्न में जो बदलाव हुआ है, इससे विद्यार्थियों को प्रवेश परीक्षा के लिए कोचिंग करने की जरूरत नहीं होगी। वह स्कूल में ही प्रतिस्पर्धा आधारित परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं। बोर्ड विद्यार्थियों के संपूर्ण विकास के लिए यह बदलाव कर रहा है। -वीके मिश्रा (सीबीएसई कोऑर्डिनेटर)
परीक्षाओं में योग्यता आधारित प्रश्नों की संख्या बढ़ने से विद्यार्थी रचनात्मक बनेंगे। इससे शिक्षकों पर भी अच्छे से पढ़ाने का दबाव होगा। वह किताब के पीछे दिए गए प्रश्नों पर निर्भर नहीं रहेंगे। प्रयोगात्मक कक्षाओं की संख्या भी बढ़ेगी। -पारुष अरोड़ा (स्कूल एसोसिएशन अध्यक्ष)