नगर निगम ने 11 कर्मचारी लगाए, हर महीने खर्च हो रहे पांच लाख रुपये, पर नहीं मिल पा रही राहत
बरेली। नगर निगम कागजों पर छुट्टा पशुओं की धरपकड़ कर रहा है। हकीकत में शहर की सड़कों पर उनका आतंक है। शहर में कोई ऐसी सड़क नहीं, जहां आपके वाहन के सामने छुट्टा पशु न आएं। शहर में घूम रहे सांड़ कई शहरवासी जान भी ले चुके हैं। यह हाल तब है, जबकि नगर निगम की दो टीमें रोज छुट्टा पशुओं को पकड़ने का दावा कर रही हैं। इन टीमों में एक अधिकारी, दस कर्मचारी और दो वाहन लगाए गए हैं। इनके वेतन और वाहन पर प्रतिमाह औसतन पांच लाख रुपये खर्च हो रहे हैं।
सीबीगंज, डोहरा रोड, बीसलपुर रोड, पीलीभीत रोड पर छुट्टा पशुओं के झुंड खतरा बन रहे हैं। नगर निगम की बोर्ड बैठक में पार्षद इस मुद्दे को कई बार उठा चुके हैं। उन्हें हर बार आश्वासन मिलता है, लेकिन शहर के लोगों को राहत नहीं मिलती। अब नए नगर आयुक्त के सामने जनता को इस समस्या से निजात दिलाने की चुनौती है।
एक हजार की क्षमता वाले शहर के एक मात्र गो-आश्रय स्थल में 1600 पशु रखे गए हैं। अब सुंदरासी में 500 की क्षमता का दूसरा गो-आश्रय स्थल बनाया जा रहा है, लेकिन तब तक यह परेशानी है कि पशु पकड़ें तो कहां ले जाएं? नगर निगम के पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. आदित्य तिवारी ने बताया कि शहर के आसपास स्थित गो-आश्रय स्थलों में 40 पशु भेजे गए हैं। अब जो पशु पकड़े जाएंगे, उन्हें भी देहात के आश्रय स्थलों में भेजेंगे।
12 दिन में दो लोगों ने गंवाई थी जान
24 जनवरी से 7 फरवरी 2024 के बीच सिर्फ 12 दिनों में छुट्टा पशुओं के हमले में शहर के दो लोगों ने जान गंवाई थी। पहली घटना 24 जनवरी को संजयनगर में हुई। सांड़ के हमले में करुणाशंकर पांडेय की मौत हो गई थी। 29 जनवरी को नेकपुर गौटिया में छुट्टा पशु के हमले में राजवीर सिंह घायल हुए थे। इलाज के दौरान पांच फरवरी को उनकी जान चली गई थी। अमर उजाला ब्यूरो
हर सड़क पर है खतरा
मैं बदायूं से जरूरी काम से बुधवार को कमिश्नर कार्यालय आई थी। यहां हर कदम पर छुट्टा पशुओं के खतरे से जूझना पड़ा। अगर टीमें एक साल से छुट्टा पशुओं को पकड़ रही हैं तो फिर इतने पशु सडकों पर क्यों दिख रहे हैं? - उपासना चौहान
मैंने बरेली शहर की सड़कों पर लोगों को छुट्टा पशुओं से बचकर निकलते देखा है। गो आश्रय स्थल और छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए बनाई गईं टीमें बेमतलब साबित हो रही हैं। सिस्टम ठीक हो तो ऐसा नहीं होगा। - सुनीता सिंह
मैं पत्नी के साथ चौकी चौराहे पर खड़ा था। अचानक एक छुट्टा पशु दौड़ते हुए गुजरा। हम दोनों पीछे न हटते तो जख्मी हो जाते। जब मुख्य मार्ग का यह हाल है तो शहर की गलियों का अंदाजा खुद लगा सकते हैं। - सुभाष चंद्र