बरेली। सीबीएसई, यूपी बोर्ड और सीआईएससीई की 12वीं के परीक्षा परिणाम में कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों के लिए भी कॅरिअर की कई राहें खुली हैं। वह भी सिविल सेवा, एनडीए, सीडीएस जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाएं दे सकते हैं।
परिणाम जारी होने के बाद कम अंक पाने वाले कई विद्यार्थी कॅरिअर को लेकर चिंतित हैं। इसको लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि 12वीं के अंकों से आपके कॅरिअर की दिशा तय नहीं होती। इस पर चिंता करने के बजाय सही दिशा में आगे बढ़ें। स्नातक में विषय चयन पर ध्यान दें। कम अंक लाने वाले छात्र भी विभिन्न प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर कॅरिअर बना सकते हैं।
सिविल सेवा परीक्षा के लिए कर सकते हैं आवेदन
शिक्षाविद डॉ. केबी त्रिपाठी ने बताया कि जिन विद्यार्थियों के 12वीं में कम अंक आए हैं, उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है। वे भी उस क्षेत्र में कॅरिअर बना सकते हैं, जिसमें मेधावियों को अवसर मिलेगा। कई ऐसे भी उदाहरण हैं जब 12वीं में फेल छात्रों ने दोबारा इंटर किया। आगे चलकर स्नातक के बाद यूपीएससी में परचम लहराया। विद्यार्थी सीयूईटी के माध्यम से देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश ले सकते हैं। कम अंक वाले छात्रों के लिए भी सिविल सेवा, कर्मचारी चयन आयोग, एनडीए, सीडीएस आदि की परीक्षा के विकल्प खुले हैं। सिविल सेवा की परीक्षा में टॉपर्स की तुलना में कम अंक लाने वालों विद्यार्थियों ने सफलता पाई है।
विषय चयन को लेकर काउंसलर से ले सकते हैं सुझाव
12वीं पास करने वाले विद्यार्थी स्नातक में विषय चयन को लेकर दोस्तों, परिजनों और काउंसलर से सलाह ले सकते हैं। वहीं, 10वीं उत्तीर्ण विद्यार्थी आगे पीसीएम, पीसीबी, कॉमर्स और मानविकी स्ट्रीम के चयन को लेकर मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र की सहायता ले रहे हैं। मनोविज्ञान की प्रवक्ता याशिका वर्मा ने बताया कि 10वीं के बाद विद्यार्थियों के मन में विषय चयन को लेकर संशय होता है। नए सत्र में इस तरह की कई कॉल आ चुकी हैं। इसमें सबसे अधिक समस्या कम अंक लाने वाले छात्र-छात्राओं को होती है। वे जानना चाहते हैं कि किस स्ट्रीम को चुनकर कॅरिअर बना सकते हैं। बताया कि यह एक मिथक है कि गणित विषय लेकर ही बेहतर कॅरिअर बनाया जा सकता है। जिन्हें गणित में रुचि नहीं है, वे वाणिज्य का चयन कर सकते हैं।
अंकों से नहीं आंकते योग्यता
विशेषज्ञ बताते हैं कि विद्यार्थी की क्षमता अंकों से नहीं आंकी जा सकती है। कई बार 12वीं के छात्र-छात्राएं संसाधनों के अभाव, पारिवारिक स्थिति या अन्य कारणों से कम अंक हासिल करते हैं। ऐसे में देश की प्रतिष्ठित सेवाओं की परीक्षा में अंक बाधक नहीं बनते। 12वीं के बाद अपनी रुचि के विषय से स्नातक करें। पहले वर्ष में विषय को समझें। दूसरे और तीसरे वर्ष में उससे संबंधित प्रमाणपत्र कोर्स कर सकते हैं।