बरेली। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने सेटेलाइट बस स्टैंड से हवाई अड्डे तक सात किलोमीटर सड़क ऊंची कर दी। इसकी वजह से पहले से ध्वस्त पड़े डिवाइडर अब इतने नीचे हो गए हैं कि कोई भी वाहन इस पार से उस पार जा सकता है। अवैध कट ने खतरा और बढ़ा दिया है। जरा सी निगाह चूकते ही लोग हादसे का शिकार हो रहे हैं।
यह स्थिति तब है, जबकि पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता सड़क सुरक्षा समिति के सचिव हैं। उनकी जिम्मेदारी है कि सड़कें दुरुस्त हों। कोई ऐसा स्थान न हो, जहां हादसों का खतरा हो। सेटेलाइट तिराहे से पीलीभीत की ओर जाने वाली इस प्रमुख सड़क पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सड़क ऊंची और गड्ढामुक्त होने से वाहनों की रफ्तार तो बढ़ गई पर सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। एक वर्ष से डिवाइडर कई स्थानों पर ध्वस्त है। सड़क के बीच पत्थर भी पड़े हैं। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता ने अभी तक इसमें सुधार के लिए कोई कार्ययोजना तक नहीं बनाई है।
सड़क तो हमने बनाई है, लेकिन डिवाइडर नगर निगम ने बनाए थे। नगर निगम अगर डिवाइडर ठीक नहीं कराता है तो हम कराएंगे। वर्ष 2023-2024 की कार्ययोजना में शामिल करते हुए बजट मांगा जाएगा। जब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत आए थे, तब डेढ़ किलोमीटर हिस्से में डिवाइडर ठीक कराए गए थे। आगे काम कराने से पहले मैं नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अभियंताओं से बात करूंगा। वे मना करेंगे तो हम एस्टीमेट बनाएंगे। - नारायण सिंह, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी
स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत सड़कों का चौड़ीकरण हुआ पर बिजली के खंभे नहीं हटाए गए। बियावानी कोठी से खुर्रम गौटिया और गांधी उद्यान से सर्किट हाउस तक, दोनों मार्ग पर आठ खंभे ऐसे हैं जो सड़क चौड़ी होने से पहले किनारे होते थे। अब ये बीच में खड़े हैं। रात में अगर स्ट्रीट लाइट नहीं जल रही हो तो हादसे की आशंका रहती है।
सेटेलाइट तिराहे से पीलीभीत-टनकपुर की ओर जाने वाले मार्ग का शुरुआती सात किमी हिस्सा लोक निर्माण विभाग के बरेली खंड के अंतर्गत है। इस मार्ग से 24 घंटे में 25 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। एक लाख लोग हर रोज सफर करते हैं, लेकिन लोक निर्माण विभाग के अफसर इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।