बरेली। रिश्तों में मतभेद होना सामान्य बात है, पर इसकी वजह से बातचीत बंद कर देना और एक-दूसरे को अपमानित करना रिश्तों के बिखराव की मूल वजह है। परिवार परामर्श केंद्र या महिला थाने में महज पति-पत्नी से जुड़े मामलों को ही तरजीह दी जाती है। कोर्ट-कचहरी में साल-दर-साल बढ़ रहे वाद इस बात का प्रमाण हैं कि अन्य रिश्तों की बुनियाद भी दरक रही है।
समाजशास्त्री डॉ. रंजू राठौर के मुताबिक करीबी रिश्तों के लिए यह स्थिति काफी घातक है। परिवार परामर्श केंद्र में हर साल इस तरह के दो हजार तो महिला थाने में 500-600 मामले दर्ज होते हैं। इसके अलावा जिले के अन्य थानों में ऐसे 80 मामले रोज आ रहे हैं। इनमें से 90 फीसदी मामले नॉन क्रिमिनल रिकॉर्ड (एनसीआर) वाले लोगों से जुड़े होते हैं।
परिवार परामर्श केंद्र की काउंसलर आयशा ने बताया कि यहां आने वाले ज्यादातर मामलों की मूल वजह संवादहीनता ही है। पुलिस दोनों पक्षों को साथ बिठाकर बात कराती है। मन का गुबार हल्का होने के बाद वह स्वयं ही सुलह कर लेते हैं। यही भूमिका यदि घर के बड़े सदस्य निभाएं तो कोर्ट-कचहरी व थाने जाने की नौबत ही नहीं आएगी।
रिश्ता बिगड़ने के लिए दोनों पक्ष जिम्मेदार होते हैं। गुस्सा, गलतियां व आपसी मतभेद सामान्य बात है, लेकिन आपस में बात करना बहुत जरूरी है। किस बात की वजह से विवाद बढ़ा, इस पर चर्चा कर रिश्ता बचाने के लिए पहल करें। अगर दस साल बात नहीं की और उसके बाद प्रयास किया तो आपके जीवन के दस साल लौटकर नहीं आ सकते। - यशिका वर्मा, मनोविज्ञानी
हर व्यक्ति चाहता है कि उसके विचारों को तरजीह दी जाए। इसी वजह से परिवार में विवाद होते हैं। इससे बचाव के लिए यह जरूरी है कि हर सदस्य एक-दूसरे के विचार और भावनाओं को समझे। सोशल मीडिया भी रिश्तों में बिखराव की प्रमुख वजह है। आपस में बातचीत करने के बजाय लोग सोशल मीडिया पर अपना वक्त बिता रहे हैं। - डॉ रंजू राठौर, समाजशास्त्री
राजेंद्रनगर के अनुराग का उनके बड़े भाई आदित्य (बदले हुए नाम) से तीन साल पहले विवाद हुआ था। उस दौरान उन्होंने बड़े भाई के साथ बदसलूकी की थी। इस पर घर के बड़ों ने अनुराग को नहीं टोका। छोटे भाई के द्वारा अपमान किया जाना और माता-पिता का सहयोग न मिलना आदित्य को बुरा लगा। दोनों भाइयों में बातचीत बंद हो गई। कुछ दिनों बात आदित्य की शादी हो गई। वह पत्नी के साथ दूसरा घर लेकर अलग रहने लगे।
संजयनगर निवासी हर्षित दो बच्चों के पिता हैं। पत्नी श्रेया (बदले हुए नाम) के साथ एक छत के नीचे रहते हैं, लेकिन दो साल से दोनों की बातचीत बंद है। श्रेया बैंककर्मी थीं। किसी रिश्तेदार ने श्रेया को लेकर तंज कस दिया तो हर्षित ने बच्चों की परवरिश का हवाला देकर उन्हें नौकरी छोड़ने के लिए कहा। श्रेया ने पति के कहने पर नौकरी छोड़ दी पर इसके बाद वह चुप रहने लगीं। हर्षित ने किसी बाहरी की वजह से उन पर अविश्वास जताया, यह श्रेया को बुरा लगा।