आंवला तहसील से मीरगंज को जोड़ने के लिए लगभग 6227.42 लाख रुपये की लागत से 790.58 मीटर लंबे पुल का निर्माण किया गया है। इस पुल से न केवल आंवला और मीरगंज तहसीलों के लोगों को आवागमन में सुगमता होगी बल्कि उत्तराखंड से लोग सीधे मथुरा, आगरा आदि स्थलों तक कम समय में आ सकेंगे। वहीं, बदायूं, कासगंज, एटा, इटावा, अलीगढ़, बुलंद शहर, सम्भल आदि जिलों के लोग सीधे उत्तराखंड के तीर्थ स्थलों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इस पुल के निर्माण को लेकर इलाके के लोगों ने कई सालों तक आंदोलन चलाया था।
इस पुल के निर्माण के लिए 4 जनवरी 2022 को तत्कालीन कैबिनेट लोक निर्माण मंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शिलान्यास किया था, तब इसके निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम को एक साल के अंदर बनाने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन निर्माण कार्य होते ही कई अड़चनें आती रहीं। विभाग ने लगभग दो साल में इस पुल को बनाकर तैयार कर दिया है। पुल का निर्माण पूरा हुए लगभग एक महीने से अधिक का समय गुजर गया है, लेकिन इसको अभी जनता के लिए नहीं खोला गया है।
मीरगंज और आंवला के मध्य नदी पार करने के लिए एक पैंटून पुल बना हुआ है। यह पुल हर साल बारिश आने से पहले 15 जून को हटा लिया जाता है। इसके बाद आसपास के इलाके के लोगों को आवागमन में भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस पुल के बनने से अब ऐसा नहीं होगा।
रात को पुल पर होती है वसूली
कैलाश गिरि मढ़ी पर पुल को बने लगभग एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है। कुछ दिनों के लिए तो पुल पर तैनात कर्मचारियों ने आवागमन होने दिया, लेकिन बाद में बंद कर दिया गया। शिवपुरी निवासी प्रतीक दीक्षित, अवधेश शर्मा, गोपाल आदि ने बताया कि पुल न खुलने से लोगों को परेशानी हो रही है। वहीं, कर्मचारी रात में भारी वाहनों से वसूली करके पुल से वाहनों को निकाल देते हैं, जबकि दिन में पुल को बंद कर देते हैं।
पुल बनकर तैयार हो गया है। यह मेरी जानकारी में है। हमने शासन में इसकी सूचना दे दी है। 15 जून के बाद किसी भी दिन पुल को जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
- धर्मपाल सिंह, कैबिनेट मंत्री