फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bareilly News: कोरोना में थमती रहीं सांसें, शोपीस बने रहे 33 वेंटिलेटर

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के शासन के दावे पर पीएम केयर फंड से मिले धूल फांक रहे करोड़ों के उपकरण प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। मानव संसाधन के बदले आश्वासन मिल रहा है। गंभीर मरीज इलाज के लिए शहर समेत महानगरों के निजी अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं।
विज्ञापन

100 करोड़ रुपये से बना तीन सौ बेड अस्पताल और उसमें उपलब्ध 28 करोड़ के अत्याधुनिक उपकरण मरीजों के किसी काम के नहीं हैं। जीवन रक्षक उपकरण बीते चार वर्ष से सिर्फ मॉकड्रिल के काम आ रहे हैं। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में मरीजों को भर्ती कराने के लिए जिले में वेंटिलेटर नहीं मिल रहे थे। कई निजी अस्पताल मौके को भुनाने में जुटे थे। उस दौरान तीन सौ बेड अस्पताल में 33 वेंटिलेटर आईसीयू में बंद थे। बीते दो साल में छह बार मॉकडि्रल के दौरान ही इन पर पड़ी धूल साफ हुई।
बता दें कि जिला अस्पताल पर मरीजों के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए तीन सौ बेड अस्पताल के निर्माण की मांग उठी थी। तब अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी थी। अब तक यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। सिर्फ ओपीडी चल रही है।
विज्ञापन


28 करोड़ के उपकरण मौजूद, बगैर विशेषज्ञ बेकार
गंभीर रोगों के इलाज के लिए खरीदे गए 20 करोड़ रुपये से अधिक के अत्याधुनिक उपकरण तालों में बंद है। वर्ष 2023 में आठ करोड़ रुपये का बजट और जारी हुआ। इससे भी तमाम उपकरणों, संसाधनों की खरीदारी हुई। अब वे एक हॉल में बंद कर दिए गए हैं। अफसरों का कहना है कि इन्हें स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजेंगे।

चूहे कुतर रहे ऑक्सीजन प्लांट की वायरिंग
तीन सौ बेड अस्पताल में मरीजों को ऑक्सीजन की कमी न हो, इसलिए पीएम केयर फंड से ही एक हजार लीटर क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट भी स्थापित हुआ। सेंट्रलाइज्ड ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम भी लगा। 40 जंबो और कई छोटे ऑक्सीजन सिलिंडर भी रखे गए। ये भी तालों में बंद हैं। बीते दिनों पूर्वाभ्यास के दौरान ऑक्सीजन प्लांट नहीं चल सका। जांच में पता चला कि चूहों ने वायरिंग कुतर दी है।

विशेषज्ञ चिकित्सकों समेत चार सौ स्टाफ की जरूरत
वेंटिलेटर संचालन समेत आईसीयू व अन्य वार्डों में इलाज के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों समेत चार सौ स्टाफ की जरूरत है। इसमें तीन हृदय रोग विशेषज्ञ, तीन ईएनटी सर्जन, चार आई सर्जन, चार बाल रोग विशेषज्ञ, चार रेडियोलाॅजिस्ट, तीन चेस्ट फिजिशियन, छह स्त्री रोग विशेषज्ञ, दो न्यूरो सर्जन, दो न्यूरो फिजिशियन, दो नेफ्रोलाॅजिस्ट, दो एनेस्थेटिक की मांग है। साथ ही, 30 फार्मासिस्ट, 12 लैब टेक्नीशियन, 05 रेडियो ईसीजी टेक्नीशियन, 02 फिजियोथेरेपिस्ट, 70 वार्ड बॉय, चार ईएमओ, 65 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मांगे गए हैं।
अस्पताल में उपलब्ध सुविधाएं
- 260 जनरल बेड ऑक्सीजन फ्लो मीटर समेत, दो बेबी वॉर्मर।
- 40 बेड का पीकू (बाल चिकित्सा गहन देखभाल इकाई) वार्ड।
- 35 बेड आईसीयू में, 33 वेंटिलेटर, 13 हाई फ्लो नेजल कैनुला।
- 160 ऑक्सीजन कन्संट्रेटर, एक डिजिटल एक्सरे (डीआर)।
- चार डिलीवरी टेबल, नौ ऑपरेशन टेबल, सीटी स्कैन यूनिट।
- तीन सौ केवीए, 250 केवीए के जनरेटर व अन्य उपकरण। ब्यूरो

अस्पताल संचालन के लिए जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। अब तक इस संबंध में कोई जवाब नहीं मिला है। विशेषज्ञ चिकित्सक, पैरामेडिकल, नर्सिंग व अन्य प्रशिक्षित स्टाफ की मांग की फाइल शासन स्तर पर लंबित हैं।
विज्ञापन

- डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें