बरेली। शहर के युवा आत्मनिर्भर बनते हुए विश्व पटल पर देश का परचम लहरा रहे हैं। कोई सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपने कौशल का दम दिखा रहा है तो कोई पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सपनों को उड़ान दे रहा है। इन युवाओं ने कुछ वर्षों में ही स्टार्टअप को देशभर में पहचान दिला दी है। विश्व युवा कौशल दिवस पर प्रस्तुत है यह विशेष रिपोर्ट...
घर के अंदर, पानी में उगा रहे सब्जियां
मॉडल टाउन निवासी करनजीत सिंह बग्गा ने सूचना प्रौद्योगिकी में और जनकपुरी के प्रफुल्ल मोना ने मैकेनोट्रॉनिक्स शाखा से बीटेक किया है। इसके बाद से वे ग्रीस की हाइड्रोपोनिक तकनीक से सब्जियां उगा रहे हैं। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के इन्क्यूबेशन फाउंडेशन (आरआईएफ) के माध्यम से इसे बड़ा बाजार मिला है।
करन बताते हैं कि इस तकनीक में पानी और प्लास्टिक के ट्यूब से सब्जियां तैयार की जाती हैं, जिसमें सब्जियां के अनंकुरित बीज डाले जाते हैं। पाइप के माध्यम से ट्यूब तक पानी पहुंचाया जाता है। इसके लिए सिस्टम तैयार है, जिसे फोन के एप से कंट्रोल किया जाता है। टमाटर, मैथी, भिंडी, बैंगन आदि पत्तेदार सब्जियां उगाई जाती हैं। इससे पूर्व पानी की जांच की जाती है। करनजीत बताते हैं कि वर्तमान में प्रफुल्ल न्यू यॉर्क से रोबोटिक्स में मास्टर्स कर रहे हैं। इसके बाद प्रोजेक्ट को विस्तार देने में अधिक सहायता मिलेगी। फिलहाल इसकी ऑनलाइन बिक्री भी की जा रही है। सबसे अधिक मांग दक्षिण भारत से है। दुबई की कंपनी से भी बात चल रही है। जल्द इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी उपलब्ध कराया जाएगा।
विदेश से लिया अनुभव, देश की तरक्की में कर रहे योगदान
पीलीभीत बाइपास निवासी अद्वैत गुप्ता ने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय अमेरिका से परास्नातक किया है। उसके बाद वहां एक कंपनी में डायनामिक्स इंजीनियर के रूप में काम करने लगे। अनुभव प्राप्त कर उन्होंने अपने देश में ही लोगों को रोजगार देने की ठानी। उन्होंने रुविवि के माध्यम से स्टार्टअप शुरु किया। अब वह पांडव एप्लीकेशंस के सीईओ है। उनकी कंपनी अन्य कंपनियों के लिए थ्रीडी प्रिंटिंग सलाहकार की तरह काम करती है। वे प्रिंटिंग का सॉफ्टवेयर बेचते हैं, जिसका नाम एम प्रवाह है। साथ ही कंपनी विश्व की सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का डाटा सुरक्षित करती है। वह देश के एक मंत्रालय के साथ काम करने वाले हैं। आठ से अधिक लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। अद्वैत अब तक फिनलैंड, अमेरिका आदि देशों की कॉन्फ्रेंस में हिस्सा ले चुके हैं।