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गांधी के विचारों को आत्मसात करके की बापू के सपनों के भारत का निर्माण होगा

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फोटो गांधी के विचारों को आत्मसात करके की बापू के सपनों के भारत का निर्माण होगा क्रासर महात्मा गांधी के शहीद दिवस पर युवाओं ने महात्मा गांधी पर साझा किए विचार अमर उजाला ब्यूरो बरेली। महात्मा गांधी की 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने हत्या कर दी थी। इस दिन को शहीदी दिवस के तौर पर याद किया जाता है। 30 जनवरी को आज इस साल महात्मा गांधी की 74वीं पुण्यतिथि है। गांधी के विचारों ने हर किसी को प्रभावित किया है। उनके आदर्शों का हर कोई कायल है। ऐसे में उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर कुछ युवाओं ने उनके विचारों को साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। युवाओं का कहना है कि सिर्फ गांधी के विचारों को पढ़ने, सुनने से कुछ नहीं होगा। हमें बापू के विचारों को जीवन में आत्मसात करना होगा। तभी हम महात्मा गांधी के सपनों के भारत को बनते हुए देख सकेंगे और यही बापू को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 000000000 युवाओं से बात भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक हैं महात्मा गांधी। जिन्होंने सत्य और अहिंसा के मार्ग  पर चलते हुए देश आजादी दिलाई। वे एक नेता ही नहीं, बल्कि युगपुरुष थे। आज विश्व शांति नेता के रूप में हमारे महात्मा गांधी को जानता है। --अमन प्रताप सिंह, छात्र, बरेली कॉलेज 0000000 भविष्य में क्या होगा, मैं यह नहीं सोचना चाहता। मुझे वर्तमान की चिंता है। ईश्वर ने मुझे आने वाले क्षणों पर कोई नियंत्रण नहीं दिया है। हमें महात्मा गांधी के इन वाक्यों को आत्मसात करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। राजनीतिक दलों को भी महात्मा गांधी के जीवन से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। --सपना कुमारी, छात्रा, खुसरो डिग्री कालेज 000000 महात्मा गांधी ने कहा था कि काम की अधिकता नहीं, अनियमितता आदमी को मार डालती है। मैं इन्हीं वाक्यों के साथ आगे बढ़ रही हूं। लोगो की दिनचर्या नियमित हो इसलिए हमारी टीम ने अमृत महोत्सव के तहत गांधी उधान में 26 जनवरी को योग कार्यशाला का आयोजन किया। आगे भी कार्यक्रम कर लोगों को जागरूक करेंगे। --शाम्भवी उपाध्याय, योग प्रशिक्षक 000000 महात्मा गांधी ने कहा था कि गुलाब को उपदेश देने की आवश्यकता नहीं होती है। वह तो केवल अपनी खुशी बिखेरता है। उसकी खुशबू ही उसका संदेश है। हमें इन विचारों को आत्मसात कर आगे बढ़ना होगा। असल मायने में बापू के सपनों के भारत का निर्माण तभी होगा। --आकांक्षा मौर्या, मेडिकल छात्रा, चौपुला 000000  बापू ने कहा था कि खुद वो बदलाव लाइयेजो आप दुनिया में देखना चाहते हैं। हम क्या कर रहे हैं, हम सिर्फ दूसरों को उनकी कमियां बता रहे हैं। पहले हमें यह तय करना होगा कि हम जिस क्षेत्र में भी काम कर रहे हैं क्या उसे पूर्ण समर्पण के साथ कर रहे हैं। जैसी दुनिया देखना चाहते हैं हमें खुद वैसा बनना होगा। --ऋषि कुमार शर्मा, छात्र, बरेली कॉलेज 0000000 जब पूरे विश्व ने गिरमिटिया श्रम को एक सामाजिक व्यावस्था के रूप में स्वीकार कर लिया था, तब महात्मा गांधी ने इस प्रथा का पुरजोर विरोध किया था। यही नहीं जब पूरी दुनिया में हिंसात्मक युद्ध छिड़ा हुआ था, तब उन्होंने ने अहिंसात्मक युद्ध शुरू कर दिया था ---अक्षिता जैन, छात्रा
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