स्पेशल बच्चों को पढ़ाती शीतल शर्मा।
- फोटो : Amar Ujala
अंतरराष्ट्रीय ब्रेल दिवस आज
फोटो
दस शिक्षकों के भरोसे 458 दृष्टिबाधितों की बेरंग दुनिया में रंग भरने की कोशिश
क्रासर
-बेसिक शिक्षा विभाग में 458 बच्चे दृष्टिबाधित सूची में
-स्कूलों में तैनात सामान्य शिक्षक ही प्रशिक्षण लेकर स्पेशल बच्चों को दे रहे समय
राहुल दुबे
बरेली। ख्वाब उनके भी होते हैं , जिनके आंखें नहीं होतीं। जिनकी आंखें हैं, वो ख्वाब में भी इस बात की कल्पना नहीं कर सकते कि आंखों के बिना जिंदगी कैसी होती है। हमारे जिले के 458 बच्चे बेसिक शिक्षा विभाग में ऐसे ही है। हालांकि विभाग की ओर से उनके लिए जो शिक्षक तैनात किए गए हैं। वो पर्याप्त नहीं है।
दृष्टिबाधित बच्चों को पढ़ाने के लिए स्पेशल एजुकेटर तैनात किए जाते हैं। जिले में इनकी संख्या बेहद कम है। जनपद में ऐसे एजुकेटर सिर्फ दस हैं जबकि बच्चे 458 हैं। ऐसे में इन बच्चों की पढ़ाई उस तरह से नहीं हो पा रही है जैसे सामान्य बच्चों की पढ़ाई होती है। एजुकेटर ब्रेल लिपि में पढ़ाने की विशेषता हासिल किए हैं तो अब वह कैम्प लगाकर इन बच्चों को पढ़ाते हैं ताकि सभी बच्चों तक कुछ न कुछ ज्ञान पहुंच सके। इसके लिए ब्लॉकवार स्कूलों को चिन्हित कर पढ़ाई कराई जा रही है।
00000
हर स्कूल में तैनात कर दिया एक नोडल
बीएसए विनय कुमार ने बताया कि हर स्कूल में स्पेशल बच्चे नहीं हैं। जिन स्कूलों में वहां उनकी पढ़ाई बाधित न हो इसके लिए वहीं के एक शिक्षक को बेसिक प्रशिक्षण देकर नोडल तैनात कर दिया है। जिससे स्पेशल बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो। यह शिक्षक उन बच्चों को लगातार बोलकर और सुनाकर पढ़ाते रहते हैं। इसी दौरान स्पेशल एजुकेटर जब पहुंचते हैं तो उन्हें ब्रेल लिपि के माध्यम से भी पढ़ाते हैं।
00000
जीजीआईसी में कैम्प लगाकर करा रहे पढ़ाई
बीएसए ने बताया कि शुरुआत में ऐसे बच्चों के लिए छह माह का विशेष कैम्प भी लगवाया जाता है। जहां इन्हें ब्रेल लिपि का बेसिक ज्ञान दिया जाता है। बताया कि जीजीआईसी में कैम्प लगाया जाता है।
0000
कई सामान्य शिक्षक बच्चों की संवार रहे जिंदगी
1-
भुता ब्लॉक के रिछा प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका शीतल शर्मा अपने विद्यालय कक्षा तीन की साहिबा को पढ़ाती है। वह यहां नोडल तैनात हैं। वह कहती हैं ब्रेल लिपि के बारे में तो वह प्रशिक्षित नहीं है लेकिन उन्होने ऐसे बच्चों को पढ़ाने का जो प्रशिक्षण लिया उसके आधार पर वह बच्चों को पढ़ाती हैं। वह बताती हैं बच्चों में कई सुधार हैं और वह तेजी से सीख रहे हैं।
2-
‘ स्पेशल ' बेटियों की ' स्पेशल मैम ' हैं दीपमाला
प्राइमरी स्कूल डभौरा गंगापुर की शिक्षिका दीपमाला पांडे स्पेशल बेटियों की स्पेशल मैम हैं। दीपमाला विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए कार्य करती हैं। स्पेशल बच्चों के स्कूल में प्रवेश बढ़ाने के लिए दीपमाला पांडे ने वन टीचर वन कॉल अभियान शुरू किया। इस अभियान के तहत अपने गांव के विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के अभिभावकों की सूची तैयार की। अभिभावको को फोन कर बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए प्रेरित किया। इसके कारण बड़ी संख्या में बेटियों के भी प्रवेश हुए। दीपमाला के इस प्रयास को बाद में जिले के 100 से अधिक स्कूलों ने भी अपनाया। सितम्बर में पीएम नरेंद्र मोदी ने उनके इस कार्य के लिए मन की बात में दीपमाला पांडेय का जिक्र कर सराहना की थी।
00000
कुल दिव्यांग छात्रों की संख्या जिले सात हजार के पार
आटिज्म पीड़ित-10
अंधता-89
सीपी-91
गंभीर न्यूरो बीमारी-6
बौनापन-20
श्रवणहीनता-373
हीमोफीलिया-1
इंटलैकुचुएल डिसएबीलिटी-626
लेप्रौसी-3
चलन अक्षमता-761
लो विजन-353
मेंटल इलनेस-789
मल्टीपिल डिसएबीलिटी-144
एमएस-27
मस्कुलर डिस्ट्राफी-102
स्पेसिफिक लर्निंग डिसएबिलिटी-3415
स्पीच एंड लैंगुएज-392
थेलेसैमिया-1
कुल-7196