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बरेली कल भी हमारा मरकज था, आज भी है : नजीब मियां

Wed, 13 Sep 2023 02:01 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
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बरेली। आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी के 105वें उर्स के आखिरी दिन देश-विदेश के लाखों जायरीन, उलमा, सज्जादगान की मौजूदगी में कुल की रस्म अदा की गई। इसी के साथ तीन रोजा उर्स का समापन हो गया।
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महफिल का आगाज दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती, सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी (अहसन मियां) की सदारत, सय्यद आसिफ मियां और उर्स प्रभारी राशिद अली खान की देखरेख में हुआ। कारी स्वालेह रजा मंजरी ने कुरान की तिलावत की। इसके बाद उलमा की तकरीर का सिलसिला शुरू हुआ।

मेहमान-ए-खुसूसी आला हजरत के पीरखाने मारहरा शरीफ के सज्जादानशीन सय्यद नजीब मियां ने कहा की बरेली कल भी हमारा मरकज था और आज भी है। अल्लाह इसकी मरकजियत को सलामत रखें। मेरा पैगाम है कि बुजुर्गों से अकीदत व मोहब्बत करें। मसलक-ए-आला हजरत पर सख्ती से कायम रहें।
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इस दौरान आसिम नूरी, महशर बरेलवी आदि ने नात-ओ-मनकबत पढ़ी। कारी रिजवान रजा ने फातिहा, दरगाह प्रमुख के पौत्र सुल्तान रजा खान ने शजरा व सय्यद मुस्तफा रजा ने दुरूद ताज पढ़ा। आखिर में मुफ्ती अहसन मियां ने दुआ की। हजारों लोग ने दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां मुरीद हुए। मंच पर दरगाह प्रमुख सुब्हानी मियां की ओर से सभी उलमा की दस्तारबंदी शाहिद नूरी, परवेज नूरी, औरंगजेब नूरी, ताहिर अल्वी, अजमल नूरी आदि ने की।
इनका रहा सहयोग

राशिद अली खान, मौलाना जाहिद रजा, शाहिद खान, हाजी जावेद खान, नासिर कुरैशी, अजमल नूरी, परवेज़ नूरी, औरंगजेब नूरी, ताहिर अल्वी, मंज़ूर रजा, आसिफ रजा, शान रजा, मुजाहिद रजा, खलील कादरी, सय्यद फैजान अली, इशरत नूरी, तारिक सईद, यूनुस गद्दी, जुहैब रजा, आलेनबी, इशरत नूरी, गौहर खान, हाजी शारिक नूरी, हाजी अब्बास नूरी, मोहसिन रज़ा, सय्यद माजिद, ज़ीशान कुरैशी, सय्यद एजाज आदि ने उर्स की व्यवस्था में सहयोग किया।
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