उन्होंने कहा कि अक्सर स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च उठाने की क्षमता न होने के कारण वंचित मुसलमानों के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त करना मुश्किल होता है, इसलिए मस्जिदें मुफ्त स्वास्थ्य व्यवस्था मुहैया कराने का एक विकल्प हो सकती हैं ताकि गरीब और वंचित मुसलमानों का जीवन स्तर बेहतर बनाया जा सके।
कुछ मस्जिदें करा रहीं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
मदरसा शाने आला हजरत के प्रधानाचार्य मुफ्ती सिराजुद्दीन कादरी ने कहा कि भारत में कुछ मस्जिदों ने गरीब और वंचित मुस्लिम छात्रों, विशेषकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए ऐसी सुविधाएं शुरू की हैं। हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन और सीड फाउंडेशन ने हैदराबाद में जनरल क्लीनिक, कौशल विकास केंद्र और वृद्धाश्रम स्थापित करने के लिए कुछ मस्जिदों को सशक्त बनाया है। ये मस्जिदें बड़ी संख्या में मुसलमानों को विभिन्न सुविधाएं प्रदान कर रही हैं।
इस्लामिक रिर्सच सेंटर के आरिफ अंसारी ने कहा कि तमाम तरह की सेवाओं में शिक्षा के क्षेत्र को सबसे पहली प्राथमिकता देनी चाहिए। इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू मुस्लिम महिलाओं को प्रशिक्षित करना है क्योंकि सबसे पहले उन्हें शिक्षा और कौशल से लैस करना होगा, ताकि समुदाय में एक वास्तविक बदलाव महसूस किया जा सके।
इस्लामिया कालेज के हाजी नाजिम बेग ने कहा कि आम मुसलामानों की सरकारी अनुदान योजनाओं पर निर्भरता को कम करने में मस्जीदें एक निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। मस्जिदों का उपयोग अनौपचारिक शिक्षा के केंद्र के रूप में किया जा सकता है, जहां से ऐसे गुणवान लोग निकल सके जिनके पास इस्लाम धर्म के अलावा आधुनिक तकनीकों और विज्ञान का व्यापक ज्ञान हो।