जिलाधिकारी ने विभिन्न पदों पर रहने के दौरान अचानक सामने आईं चुनौतियों, उनके निस्तारण को व्यक्तिगत अनुभव के साथ बेबाकी से साझा किया। सुझाव दिया कि अगर हर बात पर समझौता न करें, समर्पण से काम हो तो दबाव नहीं होता।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के जरिये समाज को संगठित कर विकास के पथ पर अग्रसर करने की अहम जिम्मेदारी होती है। इसमें कई चुनौतियां भी हैं। बात-बात पर समझौता न करें और समर्पण से कार्य किया जाए तो कोई दबाव नहीं होता। बरेली में शुक्रवार को अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में यह सुझाव जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने यूपीएससी परीक्षा में चयनित जिले की दोनों भावी आईएएस को दिए।
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जिलाधिकारी कैंप कार्यालय में शुक्रवार को अमर उजाला की ओर से जिले की कमान संभाल रहे जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी के साथ भावी आईएएस यूपीएससी परीक्षा में चयनित प्रेक्षा अग्रवाल (30वीं रैंक) और अदिति वार्ष्णेय (57वीं रैंक) का संवाद हुआ। इसमें भावी आईएएस ने जिले की जिम्मेदारी संभालने के दौरान संभावित चुनौतियां, दबाव से परे रहकर बेहतर पॉलिसी बनाने, प्राथमिकताएं और लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने समेत कई सवाल किए।
जिलाधिकारी ने विभिन्न पदों पर रहने के दौरान अचानक सामने आईं चुनौतियों, उनके निस्तारण को व्यक्तिगत अनुभव के साथ बेबाकी से साझा किया। सुझाव दिया कि अगर हर बात पर समझौता न करें, समर्पण से काम हो तो दबाव नहीं होता। इस दौरान ट्रेनी आईएएस डॉ. दीक्षा जोशी, ट्रेनी आईपीएस विक्रम दहिया ने भी अपने अनुभव साझा किए।
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आजमगढ़, नोएडा में तैनाती के बताए अनुभव
जिलाधिकारी ने मौजूदा ट्रेनी आईएएस और आईपीएस समेत यूपीएससी में चयनित दोनों बेटियों को अपने अनुभव बताए। आजमगढ़ जैसे बड़े जिले में लोकसभा चुनाव संपन्न कराने के बाद सम्मान से नवाजे जाने, टप्पल में हिंसा, नोएडा भूमि अधिग्रहण आदि के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों को साझा किया। लिए गए निर्णय और परिणाम को भी बताया।
अच्छे अधिकारियों के साथ मिलते हैं काम के बेहतर मौके
जिलाधिकारी ने बताया कि आईएएस के प्रशिक्षण के बाद उनकी तैनाती की बारी आती है। जिस जिले में पोस्टिंग हो और वहां अच्छे अधिकारी हैं तो कार्य करने के मौके मिलते हैं। अगर अफसर ध्यान न दें तो समस्याएं भी हो सकती हैं। उन्होंने जिले के वर्तमान एसएसपी द्वारा ट्रेनी आईपीएस को मौका देने और तहसील सदर के एसडीएम की तैनाती को बतौर उदाहरण समझाया।
भावी आईएएस के सवाल और जिलाधिकारी के जवाब
सवाल : प्रशिक्षण कैसा होता है और क्या ध्यान रखना चाहिए? जवाब : इस सेवा के दौरान सबसे खास पल प्रशिक्षण का ही होता है। इसमें कोई दबाव या तनाव की स्थिति नहीं होती। 40 दिन का भारत दर्शन भी होता है। प्रशिक्षण के दौरान जो दिशानिर्देश दिए जाएं बस उसे ही ध्यान रखना होता है। कोई अतिरिक्त दबाव नहीं होता।
सवाल : एक आईएएस के पास सबसे अहम शक्ति क्या होती है? जवाब : आर्थिक कमजोर, गरीब व्यक्ति को आश्रय के लिए भूमि का पटटा उपलब्ध कराने की शक्ति सिर्फ आईएएस के पास होती है। जिसे भविष्य में संबंधित स्वामी विक्रय भी कर सकता है। यह शक्ति कोर्ट के पास नहीं है। यह शक्ति एसडीएम के पद के दौरान ही मिल जाती है।
सवाल : समाज के लिए बेहतर पॉलिसी क्या हैं और कैसे बनती हैं? जवाब : आयुष्मान योजना, प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत योजना आदि। कल्पना करें एक व्यक्ति जिसके पास इलाज के पास रुपये न हों उसे पांच लाख तक मुफ्त इलाज मिले, छत न हो उसे आवास मिले और कहीं गंदगी न हो तो समाज आगे ही बढ़ेगा।
सवाल : जिलाधिकारी के तौर पर क्या प्राथमिकताएं होती हैं? जवाब : शासन की योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू कराना, उसे सफल बनाने में योगदान देना प्राथमिकता होती है। कई बार सरकार बदलने पर संबंधित योजनाएं भी बदलती हैं। उनके स्थान पर नई योजनाएं बनती हैं। जो भी योजना बनती है वह भी जनिहत में ही रहती है।
सवाल : राजनीतिक दबाव क्या हैं और कैसे सामंजस्य बनाएं? जवाब : कोई दबाव नहीं होता। प्रत्येक सरकार का घोषणापत्र होता है। इसी आधार पर जनता उन्हें चुनती है। संबंधित सरकार के जनप्रतिनिधि उसे ही लागू कराने का प्रयास करते हैं। प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर भी उसे लागू कराना जिम्मेदारी है। बस जनहित प्रभावित न हो।
सवाल : सिविल सर्विस और मल्टीनेशनल कंपनी की जॉब में क्या फर्क है? जवाब : सिविल सर्विस में हर दिन कुछ नया करने का मौका होता है। पर परिवार के लिए क्वालिटी टाइम मिलना मुश्किल है। अवकाश नहीं मिलता। एक बेहतर निर्णय से समाज को बदलने की क्षमता होती है। मल्टीनेशनल कंपनी में एक तय रूटीन पर काम होता है।
सवाल : ग्रामीण इलाकों में कार्य करने के दौरान क्या चुनौतियां हैं? जवाब : अब ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में सभी मूलभूत सुविधाएं हैं। सड़क, बिजली, पानी, इंटरनेट की घर-घर तक पहुंच है। गांव के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पारदर्शिता के साथ मुहैया कराना ही प्राथमिकता होती है। कोई खास अड़चन नहीं।
सवाल : अफसर बनने के बाद भी क्या पढ़ना जरूरी है? जवाब : जब मौका मिलता है मैं तब पढ़ता हूं। इसमें पाठयक्रम को नहीं पढ़ा जा सकता है पर समाज को बेहतर दिशा देने के लिए प्राप्त अनुभव के आधार पर छोटे-छोटे नोट्स बनाए जा सकते हैं। पूर्व में जो अफसर रह चुके हैं, उनके लेखन से कई जानकारियां मिलती हैं।
सवाल : जिलाधिकारी के तौर पर सबसे बड़ी चुनौती क्या है? जवाब : जनता की समस्याओं का समाधान करना ही सबसे बड़ी चुनौती है। गुड गवर्नेंस के लिए यह बेहद जरूरी है। जनसमस्याएं किसी को जबरन प्रभावित करने के उददेश्य से हों तो उसका समाधान कैसे कर सकते हैं। इस स्थिति में सीधे न कहना ही ज्यादा उचित होता है।
सवाल : आईएएस समाज के लिए कैसे बेहतर कार्य करें? जवाब : जब आप समाज के भले की सोचेंगे तो बेहतर पॉलिसी लेकर आएंगे। देखा जाए तो अब राजनीतिक दबाव नहीं है। नेता भी बेहतर सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं। अगर समाज को जोड़ने की क्षमता है तो यही नौकरी आपको मौके देगी।
सवाल : क्या यह नौकरी तनावपूर्ण है? जवाब : नहीं, इसमें तनाव की कोई बात नहीं है। कुछ परिस्थितियां ऐसी होती हैं, जिनमें तनाव की स्थिति रहती है। सही निर्णय से वे भी दूर हो जाती हैं। अगर कार्यालय के सभी कार्य रोज निपटाएंगे तो कोई परेशानी नहीं होगी। हालांकि, हर अफसर का अलग नजरिया होता है।