किडनी, लिवर भी हो सकते हैं खराब
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि नाइट्राजेपाम, अल्प्राजोलम दवाएं बेंजोडायजेपाइन समूह की हैं जो दर्द निवारक होती हैं। ट्रामाडॉल, कोडीन फॉस्फेट दवाएं ओपियोइड समूह की हैं, जो तंत्रिका तंत्र का संतुलन बनाकर अनिद्रा व चिंता से निजात दिलाती हैं। लंबे समय तक इन दवाओं के सेवन से इन्हें छोड़ना मुश्किल है। अगर अचानक छोड़ते हैं तो कई शारीरिक समस्याएं होती हैं। नहीं छोड़ते हैं तो किडनी, लिवर में परेशानी, मतिभ्रम, मानसिक विक्षिप्तता व अन्य दिक्कतें होती हैं। व्यक्ति आत्मघाती कदम उठा सकता है।
फुटकर दवा विक्रेता उठा चुके हैं मुद्दा
तीन सप्ताह पहले बरेली रिटेल केमिस्ट वेलफेयर सोसायटी ने सहायक आयुक्त औषधि से मुलाकात कर पंजीकरण के बिना संचालित दुकानों पर दवाओं के अवैध भंडारण, प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री पर अंकुश लगाने की मांग की थी। उन्होंने ग्रामीण इलाकों में बड़ी तादाद में झोलाछाप के जरिये नारकोटिक्स दवाओं की बिक्री की आशंका भी जताई थी। अध्यक्ष विजय श्रीवास्तव ने अवैध कारोबार पर कार्रवाई की मांग की है।
दवाओं का दुष्प्रभाव
ट्रामाडॉल : चक्कर, मितली, कब्ज है। लगातार सेवन से लिवर, किडनी खराब हो सकती हैं।
अल्प्राजोलम : भूलना, चक्कर, शारीरिक परेशानी होती है। लगातार सेवन निराशा व आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ती है।
कोडीन फॉस्फेट : सुस्ती, सांस फूलना, पसीना आना है। ज्यादा सेवन से लिवर, किडनी खराब होती है।
नाइट्राजेपम : मतिभ्रम, सिरदर्द, उबासी हैं। ज्यादा सेवन से ग्लूकोमा, किडनी, लिवर रोग हो सकते हैं।
एसएसपी घुले सुशील चंद्रभान ने बताया कि नशे व प्रतिबंधित दवाओं को बेचने वाले मेडिकल स्टोर मालिक को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। उसका भाई भी आरोपी है, दोनों के खिलाफ सीबीगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। अन्य आरोपी प्रकाश में आए तो गिरफ्तारी की जाएगी।