कारखास सिपाहियों की सुपुर्दगी रजिस्टर में लिखापढ़ी करना बना गले की फांस
फरीदपुर (बरेली)। इंस्पेक्टर रामसेवक और उसके कारखास सिपाही किसी भी इल्जाम से बचने के लिए लिखापढ़ी जरूर करते थे, ताकि शिकायत पर सीसीटीवी फुटेज या सर्विलांस से धरपकड़ का खेल खुल न जाए। नियमों को दरकिनार कर हेड मुहर्रिर की बजाय ये खुद ही सुपुर्दगी रजिस्टर में पकड़ने और छोड़ने का समय लिखते थे, रुपये बरामदगी के बाद यही रजिस्टर उनके गले की फांस बन गया है।
इंस्पेक्टर के कारखास सिपाही रात साढ़े दस बजे आलम, अशनूर व नियाज अहमद को पकड़कर थाने लाए थे। रास्ते में ही आलम और नियाज ने इन्हें रुपये देने का आश्वासन दे रखा था तो उन दोनों को मुंशी के पास रिकाॅर्ड रूम में इज्जत से बैठाया गया। अशनूर ने कोई रुपया न होने और न दे पाने की बात पहले ही कह दी तो उसे हवालात में बंद किया गया। इसके बाद इंस्पेक्टर के इशारे पर सिपाहियों ने तस्करों के सरगना से संपर्क किया। बताते हैं कि आलम का ढाबा पार्टनर थाने पहुंचा और उसने उन्हीं कारखास सिपाहियों से सौदेबाजी की। सिपाहियों ने 15 लाख से सौदा शुरू किया जो कई बार इंस्पेक्टर से बात के बाद सात लाख में तय हो गया।
आलम के पार्टनर ने तत्काल सात लाख रुपये की व्यवस्था कर दोनों को छोड़ने का सौदा कर लिया। रात के करीब 12 बजे सिपाहियों ने ढाबा पार्टनर से सुपुर्दगी रजिस्टर में आलम व नियाज अहमद की एंट्री कराकर इन्हीं सिपाहियों ने औपचारिकता पूरी कर ली। फिर उन दोनों को ढाबा पार्टनर के सुपुर्द कर दिया गया। हवालात में बंद अशनूर को भरोसा दिलाया कि वह कम रुपये मंगवा लेगा तो सुबह उसे भी छोड़ देंगे। कुछ नहीं देगा तो उसका चालान कर दिया जाएगा। संवाद