कोरोना काल में खून की कमी से न जाए जान, इसलिए करते रहे रक्तदान
बरेली। कोरोना काल में खून की कमी से किसी की जान न जाए, इसलिए स्वैच्छिक रक्तदाता आगे आए और संक्रमण की आशंका के बावजूद उन्होंने रक्तदान का संकल्प पूरा किया। महादान करने वाले लोगों का कहना है कि रक्त का निर्माण फैक्टरी में नहीं होता, इसलिए मानव को मानव का मददगार बनना जरूरी है। रक्तदाताओं ने विश्व रक्तदाता दिवस के उपलक्ष्य में 14 जून को जिला अस्पताल ब्लड बैंक परिसर में अमर उजाला फाउंडेशन के तत्वावधान में लग रहे रक्तदान शिविर में लोगों से बढ़-चढ़कर रक्तदान की अपील की है।
46 साल की उम्र, 71 बार कर चुके रक्तदान
पटेल नगर के रहने वाले सिविल डिफेंस से जुड़े 46 वर्षीय अमित पंत ने 71 बार रक्तदान कर चुके हैं। अमित का कहना है कि करीब 20 साल की आयु में उन्होंने पहली बार रक्तदान किया था। रक्त देकर लोगों जान बचाने का जज्बा उस दौरान जगा तो रक्तदान करने का संपकल्प ले लिया। उन्होंने कहा कि विज्ञान की ओर से खोजी गई अब तक की सभी तकनीकों में रक्तदान सबसे अहम है, जो मानव को मानव से जोड़ती है।
19 साल की उम्र, तीन बार कर चुकी रक्तदान
नेशनल बॉक्सिंग में कांस्य पदक विजेता नंदिनी लाल महज 19 साल की आयु में तीन बार रक्तदान कर चुकी हैं। आकांक्षा इंक्लेव की रहने वाली नंदिनी ने बताया कि पहली बार उन्होंने आईएमए में रक्तदान किया था। फिर कोरोना काल में खून की कमी से लोगों की जान सांसत में होने की जानकारी पर दूसरी बार और तीन दिन पहले उन्होंने तीसरी बार रक्तदान किया है। बताया कि इससे किसी तरह की कमजोरी नहीं बल्कि खुशी मिलती है।
78 बार कर चुके रक्तदान, जज्बा शतक का
इलेक्ट्रॉनिक्स के बिजनेसमेन रवि टंडन कहते हैं कि रक्त का दान सिर्फ मानव ही मानव को कर सकता है। ऐसे में अगर रक्तदान का मौका मिला है तो मानव सेवा का इसके अतिरिक्त कोई और अच्छा विकल्प नहीं हो सकता है। उन्होंने बताया कि उनकी उम्र 47 साल है और वह अब तक 78 बार रक्तदान कर चुके हैं। वह सौ से भी ज्यादा बार रक्तदान की उम्मीद रखते हैं। कहा, जब तक रक्तदान के लिए सक्षम हूं तब तक लोगों की मदद करने के लिए तैयार रहेंगे।
जागरूकता : 25 युवा बने स्वैच्छिक रक्तदाता
राजेंद्र नगर के रहने वाले कारोबारी संजीव जिंदल अब तक 30 बार रक्तदान कर चुके हैं। पहली बार उन्होंने 18 साल की उम्र में रक्तदान किया था। उन्होंन बताया कि अब वह युवाओं को रक्तदान के लिए जागरूक कर रहे हैं। जिसका नतीजा रहा कि 25 युवा उनके साथ रक्तदान के लिए तैयार हैं। जो जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से भी रक्तदान की अपील की है ताकि रक्त की कमी से किसी की जान न जाए। लोग सुरक्षित रहें।
ताकि किसी परिवार को न पड़े खून की कमी
इंद्रानगर के रहने वाले कमलजीत सिंह बताते हैं कि 26 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार एक महिला की जान बचाने के लिए रक्तदान किया था। उस दिन उनका बेटा उसी अस्पताल में भर्ती था। तभी से उन्होंने संकल्प लिया और अब तक करीब 75 बार रक्तदान कर चुके हैं। बताया कि उन्होंने कोविशील्ड का टीका भी लगवाया है। बृहस्पतिवार को उन्होंने 76वीं बार रक्तदान किया। उन्होंने लोगों की मदद करने का सबसे सुरक्षित विकल्प रक्तदान को बताया है।