बरेली। लघु एवं सिंचाई विभाग की ओर से बहगुल नदी को जीवनदान देने की तैयारी चल रही है। विभाग की ओर से नदी में जगह-जगह ऐनीकट लगाए जाएंगे, जिससे आसपास एक बड़ी जल समस्या का समाधान होगा। हर समय नदी में जल बना रहेगा। नदी और उसके आसपास इलाके में जलस्तर सुधरेगा व सिंचाई व्यवस्था में भी बड़ा सुधार आएगा। विभाग की ओर से फिलहाल इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है। प्रस्ताव पास होने के बाद नदी में ऐनीकट लगाने की तैयारी शुरू की जाएगी।
जिले में बहगुल नदी उत्तराखंड से निकलकर किच्छा-बहेड़ी होते हुए फतेहगंज पश्चिमी के नजदीक जाकर रामगंगा नदी में मिल जाती है। वैसे तो बहगुल नदी में अधिकतर दिनों में पानी बना रहता है, लेकिन मई व जून के माह में नदी सूख जाती है। उस दौरान यह हालत हो जाती है कि जहां-तहां गड्ढों में ही पानी भरा हुआ दिखाई देता है। उस दौरान एक बड़ी जल समस्या आकर खड़ी हो जाती है। नदी के आसपास रहने वाले पशु पक्षियों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। इन तमाम समस्याओं से निपटने के लिए लघु एवं सिंचाई विभाग ने बड़ी तैयारी की है।
ऐनीकट लगाने से नदी में कभी पानी नहीं सूखेगा। बारिश के दिनों में अतिरिक्त पानी ऐनीकट के ऊपर से निकल जाएगा जबकि शेष पानी जमा करने या रोकने का काम ऐनीकट करेंगे।
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ये होता है ऐनीकट
- बहगुल नदी में उसकी आधी से ज्यादा गहराई तक एक ऐसा बांध या पक्की दीवार बनाई जाएगी, जो पानी के बहाव को रोकने का काम करेगी। अक्सर बारिश में नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है, तो अतिरिक्त पानी ऐनीकट के ऊपर से निकल जाएगा। जहां तक पक्की दीवार बनी होगी। वहां तक पानी जमा हो जाएगा।
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ये होंगे फायदे
- मई-जून के माह में भी नहीं सूखेगी नदी
- नदी और आसपास इलाके में जलस्तर सुधरेगा
- सिंचाई व्यवस्था में सुधार आएगा
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- विभाग की ओर से बहगुल नदी में ऐनीकट लगाने का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। यह प्रस्ताव पास होने के बाद नदी में ऐनीकट बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। अगर यह योजना सफल हुई तो अन्य नदियों में भी ऐनीकट लगाए जाएंगे।
- चरन सिंह, जूनियर इंजीनियर लघु एवं सिंचाई विभाग
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