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हिंदी में होंगे सारे काम तभी मिलेगा उसे सम्मान

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हिंदी हैं हम - फोटो : Amar Ujala
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साहित्य से जुड़े लोगों ने कहा- हिंदी की समृद्धि के लिए सतत प्रयासों की आवश्यकता

बरेली। आम बोलचाल में तो हिंदी का कोई विकल्प नहीं है लेकिन उसे अपने कामकाज में भी शामिल करना होगा तभी उसकी समृद्धि के रास्ते खुलेंगे। साहित्य और संचार से जुड़े लोग इसे काफी सकारात्मक मानते हैं कि सोशल मीडिया पर हिंदी भाषा का सर्वाधिक प्रयोग किया जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि हिंदी की समृद्धि के लिए एक दिन या पखवाड़ा काफी नहीं है बल्कि सतत् प्रयासों की आवश्यकता है।

हिंदी जन-जन को जोड़ने वाली भाषा

भाषा ही किसी राष्ट्र की संस्कृति की संवाहक होती है और उसके लिए एक आधारभूत उपकरण का कार्य करती है। भाषा ज्ञान न हो तो उस राष्ट्र की संस्कृति नहीं समझी जा सकती। हिंदी देश की राजभाषा तो बनी पर राष्ट्रभाषा का लक्ष्य अभी दूर है। व्यक्तिगत स्वार्थों और गलत नीतियों के कारण जो सम्मान और प्रतिष्ठा हिंदी को मिलनी चाहिए थी, वह अब तक नहीं मिल पाई है। हिंदी से अपने ही घर में परायों जैसा व्यवहार उचित नहीं है। राष्ट्र का सम्मान और गौरव बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि हम हिंदी का वास्तविक सम्मान उसे दिलाएं। हिंदी वैज्ञानिक भाषा है, प्रेम की भाषा है, जन-जन को जोड़ने वाली भाषा है। -डॉ. मीनू खरे, आकाशवाणी केंद्र की प्रमुख

आत्मसम्मान के लिए हिंदी को दें सम्मान

अमर उजाला के इस प्रयास को प्रणाम जो भावी पीढ़ी में हिंदी के संस्कार रोपने का अनूठा प्रयास कर रहा है। जब हम जन्म ले रहे होते हैं तब आवाजों की कोसी धुनें इस धरती से हमारा परिचय स्थापित कराने में लग जाती हैं। यह शब्दों का प्रथम परिचय, मां की गोद में आने के साथ ही नरम लोरियों की लाड़ में पिरोई एक भाषा एक संस्कार रचती है। हिंदी सिर्फ एक भाषा ही नहीं है यह हमारे इस संसार में वार्तालाप द्वारा खुद को खड़ा करने का प्रथम माध्यम है। जिस तरह मां का स्थान कोई नहीं ले सकता वैसे ही हिंदी का स्थान कोई भाषा नहीं ले सकती। यह सम्मान हिंदी को देना अपने खुद के आत्म सम्मान के लिए बहुत जरूरी है। - डॉ. कविता अरोरा, कवियत्री
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