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Bareilly News: होटलों के बाद अब औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी

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बरेली। होटलों पर 10 से 25 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने के बाद जिले में बगैर औपचारिकता पूरी किए भूगर्भ जल दोहन कर रहे औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है। अधिकारियों के मुताबिक नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से दिशानिर्देश मिलते ही सर्वे शुरू होगा।
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भूगर्भ जल विभाग के सीनियर हाइड्रोलॉजिस्ट गणेश नेगी के मुताबिक, विभाग में अब तक करीब तीन सौ पंजीकरण हुए हैं। इसमें होटलों के अलावा औद्योगिक प्रतिष्ठान शामिल हैं। होटलों के पंजीकरण के लिए पूर्व में पर्यटन विभाग की ओर से प्राप्त सूची के जरिये संपर्क किया गया था। तीन होटलों को छोड़कर सभी ने पंजीकरण करा लिया है। इसी दौरान जिला उद्योग एवं प्रोत्साहन केंद्र से प्राप्त सूची के आधार पर करीब दो सौ फैक्टरी संचालकों की भी क्रमवार बैठकें की गई थीं। 95 फीसदी उद्यमियों ने भूगर्भ जल दोहन के लिए पंजीकरण करा लिया है। साथ ही, वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का आश्वासन भी दिया है, ताकि भूमिगत जल दोहन के सापेक्ष पूर्ति भी हो सके।

पंजीकरण न कराने वालों पर कसेगा शिकंजा
सूची से इतर जिन उद्यमियों या फैक्टरी संचालकों ने अब तक पंजीकरण नहीं कराया है, उनसे पंजीकरण के लिए अपील की है। ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। एनजीटी भूमिगत जल दोहन के प्रति बेहद गंभीर है। कभी भी सर्वे के दिशानिर्देश जारी होने की स्थिति में जांच पड़ताल शुरू हो सकती है। तब बगैर अनुमति भूमिगत जल दोहन करने पर जुर्माना की कार्रवाई होगी।
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दो से पांच लाख का लग सकता है जुर्माना
भूगर्भ जल दोहन करने की स्थिति में पंजीकरण न कराने वालों पर दो से पांच लाख रुपये तक या इससे अधिक का आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान है। संचालकों को फैक्टरी में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगाना अनिवार्य है। उन्होंने अवैध चल रहे स्विमिंग पूल, पानी का कारोबार करने वालों को भी पंजीकरण की हिदायत दी है।
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